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दंड प्रक्रिया संहिता, 1973

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/अध्याय 24/346 / 534

305प्रक्रिया, जब निगम या रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभियुक्त है

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 88–89स्रोत

(1) इस धारा में “निगम” से कोई निगमित कम्पनी या अन्य निगमित निकाय अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी भी है ।

(2) जहां कोई निगम किसी जांच या विचारण में अभियुक्त व्यक्ति या अभियुक्त व्यक्तियों में से एक है वहां वह ऐसी जांच या विचारण के प्रयोजनार्थ एक प्रतिनिधि नियुक्त कर सकता है और ऐसी नियुक्ति निगम की मुद्रा के अधीन करना आवश्यक नहीं होगा ।

(3) जहां निगम का कोई प्रतिनिधि हाजिर होता है, वहां इस संहिता की इस अपेक्षा का कि कोई बात अभियुक्त की हाजिरी में की जाएगी या अभियुक्त को पढ़कर सुनाई जाएगी या बताई जाएगी या समझाई जाएगी, इस अपेक्षा के रूप में अर्थ लगाया जाएगा कि वह बात प्रतिनिधि की हाजिरी में की जाएगी, प्रतिनिधि को पढ़कर सुनाई जाएगी या बताई जाएगी या समझाई जाएगी और किसी ऐसी अपेक्षा का कि अभियुक्त की परीक्षा की जाएगी, इस अपेक्षा के रूप में अर्थ लगाया जाएगा कि प्रतिनिधि की परीक्षा की जाएगी ।

(4) जहां निगम का कोई प्रतिनिधि हाजिर नहीं होता है, वहां कोई ऐसी अपेक्षा, जो उपधारा (3) में निर्दिष्ट है, लागू नहीं होगी ।

(5) जहां निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा (वह चाहे जिस नाम से पुकारा जाता हो) जो निगम के कार्यकलाप का प्रबंध करता है या प्रबंध करने वाले व्यक्तियों में से एक है, हस्ताक्षर किया गया तात्पर्यित इस भाव का लिखित कथन फाइल किया जाता है कि कथन में नामित व्यक्ति को इस धारा के प्रयोजनों के लिए निगम के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया है, वहां न्यायालय, जब तक इसके प्रतिकूल साबित नहीं किया जाता है, यह उपधारणा करेगा कि ऐसा व्यक्ति इस प्रकार नियुक्त किया गया है।

(6) यदि यह प्रश्न उठता है कि न्यायालय के समक्ष किसी जांच या विचारण में निगम के प्रतिनिधि के रूप में हाजिर होने वाला कोई व्यक्ति ऐसा प्रतिनिधि है या नहीं, तो उस प्रश्न का अवधारण न्यायालय द्वारा किया जाएगा ।

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