दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/प्रथम अनुसूची
प्रथम अनुसूची — अपराधों का वर्गीकरण
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 137–178स्रोत
स्पष्टीकरण नोट : (1) भारतीय दंड संहिता के अधीन अपराधों के बारे में, उस धारा के सामने की, जिसका संख्यांक प्रथम स्तम्भ में दिया हुआ है, द्वितीय और तृतीय स्तम्भों की प्रविष्टियां भारतीय दंड संहिता की अपराध की परिभाषा के और उसके लिए विहित दंड के रूप में आशयित नहीं हैं, वरन् उस धारा का सारांश बताने के लिए ही आशयित हैं ।
(2) इस अनुसूची में (i) “प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट” और “कोई मजिस्ट्रेट” पदों के अंतर्गत महानगर मजिस्ट्रेट भी है, किन्तु कार्यपालन मजिस्ट्रेट नहीं है; (ii) “संज्ञेय” शब्द “कोई पुलिस अधिकारी वारंट के बिना गिरफ्तार कर सकेगा” के लिए है; और (iii) “असंज्ञेय” शब्द “कोई पुलिस अधिकारी वारंट के बिना गिरफ्तार नहीं करेगा” के लिए है।
| धारा | अपराध | दंड | संज्ञेय या असंज्ञेय | जमानतीय या अजमानतीय | किस न्यायालय द्वारा विचारणीय है |
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| अध्याय 5—दुष्प्रेरण | |||||
| 109 | किसी अपराध का दुष्प्रेरण यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणाम-स्वरूप किया जाता है और जहां उसके दंड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबंध नहीं है । | वही जो दुष्प्रेरित अपराध के लिए है । | इसके अनुसार कि दुष्प्रेरित अपराध संज्ञेय है या असंज्ञेय । | इसके अनुसार कि दुष्प्रेरित अपराध जमानतीय है या अजमानतीय । | उस न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा दुष्प्रेरित अपराध विचारणीय है। |
| 110 | किसी अपराध का दुष्प्रेरण, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 111 | किसी अपराध का दुष्प्रेरण, जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है, परन्तुक के अधीन रहते हुए । | वही जो दुष्प्रेरित किए जाने के लिए अशयित अपराध के लिए है। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 113 | किसी अपराध का दुष्प्रेरण, जब दुष्प्रेरित कार्य से ऐसा प्रभाव पैदा होता है जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न है । | वही दंड जो किए गए अपराध के लिए है। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 114 | किसी अपराध का दुष्प्रेरण, यदि दुष्प्रेरक अपराध किए जाते समय उपस्थित है। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 115 | मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध का दुष्प्रेरण यदि दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप अपराध नहीं किया जाता । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | अजमानतीय | यथोक्त |
| यदि अपहानि करने वाला कार्य दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाता है। | चौदह वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 116 | कारावास से दंडनीय अपराध का दुष्प्रेरण, यदि दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप अपराध नहीं किया जाता है। | उस दीर्घतम अवधि के एक चौथाई भाग तक का कारावास जो अपराध के लिए उपबंधित है, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | इसके अनुसार कि दुष्प्रेरित अपराध जमानतीय है या अजमानतीय । | यथोक्त |
| यदि दुष्प्रेरक या दुष्प्रेरित व्यक्ति ऐसा लोक सेवक है जिसका कर्तव्य निवारित करना है। | उस दीर्घतम अवधि के आधे भाग तक का कारावास, जो अपराध के लिए उपबंधित है, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
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| लोक साधारण द्वारा या दस से अधिक व्यक्ति द्वारा अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | इसके अनुसार कि दुष्प्रेरित अपराध संज्ञेय है या असंज्ञेय । | इसके अनुसार कि दुष्प्रेरित अपराध जमानतीय है या अजमानतीय । | उस न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा दुष्प्रेरित अपराध विचारणीय है। | |
| 118 | मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना, यदि अपराध कर दिया जाता है। | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | अजमानतीय | यथोक्त |
| यदि अपराध नहीं किया जाता है। | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | जमानतीय | यथोक्त | |
| 119 | किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है, यदि अपराध कर दिया जाता है। | उस दीर्घतम अवधि के आधे भाग तक का कारावास जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | इसके अनुसार कि दुष्प्रेरित अपराध जमानतीय है या अजमानतीय। | यथोक्त |
| यदि अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय है । | दस वर्ष के लिए कारावास । | यथोक्त | अजमानतीय | यथोक्त | |
| यदि अपराध नहीं किया जाता है । | उस दीर्घतम अवधि के एक चौथाई भाग तक का कारावास जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | यथोक्त | |
| 120 | कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना, यदि अपराध कर दिया जाता है। | यथोक्त | यथोक्त | इसके अनुसार कि दुष्प्रेरित अपराध जमानतीय है या अजमानतीय। | यथोक्त |
| यदि अपराध नहीं किया जाता है । | उस दीर्घतम अवधि के आठवें भाग का कारावास जो अपराध के लिए उपबंधित है, या जुर्माना, या दोनों । | इसके अनुसार के दुष्प्रेरित अपराध संज्ञेय है या असंज्ञेय। | जमानतीय | उस न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा दुष्प्रेरित अपराध विचारणीय है। | |
| अध्याय 5क—आपराधिक षड्यंत्र | |||||
| 120ख | मृत्यु या आजीवन कारावास या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के कठिन कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र । | वही, जो उस अपराध के, जो षड्यंत्र द्वारा उद्दिष्ट है, दुष्प्रेरण के लिए है। | इसके अनुसार कि अपराध, जो कि षड्यंत्र द्वारा उद्दिष्ट है, संज्ञेय है या असंज्ञेय । | इसके अनुसार कि वह अपराध जो षड्यंत्र द्वारा उद्दिष्ट है, जमानतीय है या अजमानतीय । | उस न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा उस अपराध का दुष्प्रेरण, जो षड्यंत्र द्वारा उद्दिष्ट है, विचारणीय है । |
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| कोई अन्य आपराधिक षड्यंत्र । | छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट | |
| अध्याय 6—राज्य के विरुद्ध अपराध | |||||
| 121 | भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना, या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना । | मृत्यु या आजीवन कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| 121क | राज्य के विरुद्ध कतिपय अपराधों को करने के लिए षड्यंत्र । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 122 | भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने के आशय से आयुध आदि संग्रह करना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 123 | युद्ध करने की परिकल्पना को सुकर बनाने के आशय से छिपाना। | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 124 | किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना। | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 124क | राजद्रोह । | आजीवन कारावास और जुर्माना, या तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना, या जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 125 | भारत सरकार से मैत्री संबंध रखने वाली या उससे शांति का संबंध रखने वाली किसी एशियाई शक्ति के विरुद्ध युद्ध करना या ऐसे युद्ध करने का दुष्प्रेरण । | आजीवन कारावास और जुर्माना, या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना, या जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 126 | भारत सरकार के साथ मैत्री संबंध रखने वाली या उससे शान्ति का संबंध रखने वाली किसी शक्ति के राज्यक्षेत्र में लूटपाट करना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना और कुछ सम्पत्ति का समपहरण। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 127 | धारा 125 और 126 में वर्णित युद्ध या लूटपाट द्वारा ली गई सम्पत्ति प्राप्त करना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 128 | लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्ध कैदी को अपनी अभिरक्षा में से निकल भागने देना । | आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 129 | अपेक्षा से लोक सेवक का राजकैदी या युद्ध कैदी का अपनी अभिरक्षा में से निकल भागना सहन करना । | तीन वर्ष के लिए सादा कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
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| 130 | ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुड़ाना या संश्रय देना या ऐसे कैदी के फिर से पकड़े जाने का प्रतिरोध करना। | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| अध्याय 7—सेना, नौसेना और वायुसेना से संबंधित अपराध | |||||
| 131 | विद्रोह का दुष्प्रेरण या किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को उसकी राजनिष्ठा या कर्तव्य से विचलित करने का प्रयत्न करना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| 132 | विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाए । | मृत्यु या आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 133 | आफिसर सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ आफिसर पर जब वह आफिसर अपने पद निष्पादन में हो, हमले का दुष्प्रेरण । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 134 | ऐसे हमले का दुष्प्रेरण, यदि हमला किया जाता है । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 135 | आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन का दुष्प्रेरण । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 136 | ऐसे आफिसर, सैनिक नौसैनिक या वायुसैनिक को, जिसने अभि-त्यजन किया है, संश्रय देना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 137 | मास्टर या भारसाधक व्यक्ति की उपेक्षा से वाणिज्यिक जलयान पर छिपा हुआ अभित्याजक। | पांच सौ रुपए का जुर्माना। | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 138 | आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अनधीनता के कार्य का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप वह अपराध किया जाता है। | छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 140 | इस आशय से सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली पोशाक पहनना या कोई टोकन धारण करना कि यह विश्वास किया जाए कि वह ऐसा सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक है । | तीन मास के लिए कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| अध्याय 8—लोक प्रशान्ति के विरुद्ध अपराध | |||||
| 143 | विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होना । | छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 144 | किसी घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जमाव में सम्मिलित होना। | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
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| 145 | किसी विधिविरुद्ध जमाव में यह जानते हुए कि उसके बिखर जाने का समादेश दिया गया है सम्मिलित होना या उसमें बने रहना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 147 | बल्वा करना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 148 | घातक आयुध से सज्जित होकर बल्वा करना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 149 | यदि विधिविरुद्ध जमाव के किसी सदस्य द्वारा अपराध किया जाता है तो ऐसे जमाव का हर अन्य सदस्य उस अपराध का दोषी होगा । | वही जो उस अपराध के लिए है। | इसके अनुसार कि वह अपराध संज्ञेय है या असंज्ञेय । | इसके अनुसार कि अपराध जमानतीय है या अजमानतीय । | वह न्यायालय जिसके द्वारा वह अपराध विचारणीय है। |
| 150 | विधिविरुद्ध जमाव में भाग लेने के लिए व्यक्तियों को भाड़े पर लेना, वचनबद्ध करना, या नियोजित करना । | वही जो उस ऐसे जमाव के सदस्य के लिए और ऐसे जमाव के किसी सदस्य द्वारा किए गए किसी अपराध के लिए है। | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 151 | पांच या अधिक व्यक्तियों के किसी जमाव को बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात् उसमें जानते हुए सम्मिलित होना या बने रहना । | छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 152 | लोक सेवक जब बल्वे इत्यादि को दबा रहा हो तब उस पर हमला करना या उसे बाधित करना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 153 | बल्वा कराने के आशय से स्वैरिता से प्रकोपन देना, यदि बल्वा किया जाता है। | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| यदि बल्वा नहीं किया जाता है । | छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट | |
| 153क | वर्गों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | अजमानतीय | यथोक्त |
| पूजा के स्थान आदि में वर्गों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन । | पांच वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 153ख | राष्ट्रीय एकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन, प्राख्यान करना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि सार्वजनिक पूजा स्थल आदि पर किया जाए। | पांच वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 154 | बल्वे आदि की इत्तिला का भूमि के स्वामी या अधिभोगी द्वारा न दिया जाना । | एक हजार रुपए का जुर्माना । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
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| 155 | जिस व्यक्ति के फायदे के लिए या जिसकी ओर से बल्वा होता है उस व्यक्ति द्वारा उसका निवारण करने के लिए सब विधिपूर्ण साधनों का उपयोग न किया जाना । | जुर्माना | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 156 | जिस स्वामी या अधिभोगी के फायदे के लिए बल्वा किया जाता है, उसके अभिकर्ता द्वारा उसका निवारण करने के लिए सब विधिपूर्ण साधनों का उपयोग न किया जाना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 157 | विधिविरुद्ध जमाव के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को संश्रय देना । | छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 158 | विधिविरुद्ध जमाव या बल्वे में भाग लेने के लिए भाड़े पर जाना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| या सशस्त्र चलना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 160 | दंगा करना । | एक मास के लिए कारावास, या सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| अध्याय 9—लोक सेवकों द्वारा या उनसे संबंधित अपराध | |||||
| 161 | लोक सेवक होते हुए या होने की प्रत्याशा रखते हुए और पदीय कार्य के बारे में वैध पारिश्रमिक से भिन्न परितोषण लेना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 162 | लोक सेवक पर भ्रष्ट या अवैध साधनों द्वारा असर डालने के लिए परितोषण लेना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 163 | लोक सेवक पर वैयक्तिक असर डालने के लिए परितोषण लेना । | एक वर्ष के लिए सादा कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 164 | अंतिम दो पूर्वगामी धाराओं में परिभाषित अपराधों का लोक सेवक द्वारा अपने बारे में दुष्प्रेरण । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 165 | लोक सेवक, जो ऐसे लोक सेवक द्वारा की गई कार्यवाही या कार्य से सम्पृक्त व्यक्ति से प्रतिफल के बिना कोई मूल्यवान चीज अभिप्राप्त करता है । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 165क | धारा 161 या धारा 165 के अधीन दंडनीय अपराधों के दुष्प्रेरण के लिए दंड। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 166 | लोक सेवक, जो किसी व्यक्ति को क्षति कारित करने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा करता है। | एक वर्ष के लिए सादा कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | यथोक्त |
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| 166क | लो सेवक, जो विधि के अधीन के निदेश की अवज्ञा करता है । | कम से कम छह मास के लिए कारावास जो दो वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना | संज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 166ख | अस्पताल द्वारा पीड़ित का उपचार न किया जाना । | एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त ।] |
| 167 | लोक सेवक, जो क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 168 | लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में लगता है । | एक वर्ष के लिए सादा कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 169 | लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से संपत्ति क्रय करता है या उसके लिए बोली लगाता है । | दो वर्ष के लिए सादा कारावास, या जुर्माना, या दोनों और यदि संपत्ति क्रय कर ली गई है तो उसका अधिहरण । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 170 | लोक सेवक का प्रतिरूपण । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | अजमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 171 | कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनना या टोकन को धारण करना। | तीन मास के लिए कारावास, या दो सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | यथोक्त |
| अध्याय 9क—निर्वाचन संबंधी अपराध | |||||
| 171ङ | रिश्वत । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों, या यदि सत्कार के रूप में ही ली गई है तो केवल जुर्माना । | असंज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 171च | निर्वाचन में असम्यक् असर डालना । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| निर्वाचन में प्रतिरूपण । | यथोक्त | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त | |
| 171छ | निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन । | जुर्माना | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 171ज | निर्वाचन के सिलसिले में अवैध संदाय। | पांच सौ रुपए का जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 171झ | निर्वाचन लेखा रखने में असफलता । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 144 | |||||
| अध्याय 10—लोक सेवकों के विधिपूर्ण प्राधिकार का अवमान | |||||
| 172 | लोक सेवक द्वारा निकाले गए समन की तामील से या की गई अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाना । | एक मास के लिए सादा कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| यदि वह समन या सूचना न्यायालय में वैयक्तिक हाजिरी आदि अपेक्षित करती है । | छह मास के लिए सादा कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 173 | किसी समन या सूचना की तामील या लगाया जाना निवारित करना या उसके लगाए जाने के पश्चात् उसे हटाना या उद्घोषणा को निवारित करना । | एक मास के लिए सादा कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि समन आदि न्यायालय में वैयक्तिक हाजिरी आदि अपेक्षित करते हैं । | छह मास के लिए सादा कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 174 | किसी स्थान में स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने का वैध आदेश न मानना या वहां से प्राधिकार के बिना चला जाना । | एक मास के लिए सादा कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि आदेश न्यायालय में वैयक्तिक हाजिरी यदि अपेक्षित करता है। | छह मास के लिए सादा कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 174क | इस संहिता की धारा 82 की उपधारा (1) के अधीन प्रकाशित उद्घोषणा की अपेक्षानुसार विनिर्दिष्ट स्थान और विनिर्दिष्ट समय पर हाजिर होने में असफलता। | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माने से, या दोनों से । | संज्ञेय | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 175 | किसी ऐसे मामले में जहां किसी व्यक्ति को, उद्घोषित अपराधी के रूप में घोषित करते हुए इस संहिता की धारा 82 की उपधारा (4) के अधीन घोषणा की गई है। | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त] |
| दस्तावेज पेश करने या पारित करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को ऐसी दस्तावेज पेश करने का साशय लोप। | एक मास के लिए सादा कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | [असंज्ञेय] | [जमानतीय] | अध्याय 26 के उपबंधों के अधीन रहते हुएवह न्यायालय जिसमें अपराध किया गया है ; या यदि अपराध न्यायालय में नहीं किया गया है तो कोई मजिस्ट्रेट । | |
| यदि उस दस्तावेज का न्यायालय में पेश किया जाना या परिदत्त किया जाना अपेक्षित है। | छह मास के लिए सादा कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
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| 176 | सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को ऐसी सूचना या इत्तिला देने का साशय लोप । | एक मास के लिए सादा कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| यदि अपेक्षित सूचना या इत्तिला अपराध किए जाने आदि के विषय में है। | छह मास के लिए सादा कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| यदि सूचना या इत्तिला इस संहिता की धारा 356 की उपधारा (1) के अधीन दिए गए आदेश द्वारा अपेक्षित है। | छह मास के लिए सादा कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 177 | लोक सेवक को जानते हुए मिथ्या इत्तिला देना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि अपेक्षित इत्तिला अपराध किए जाने आदि के विषय में हो । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 178 | शपथ से इनकार करना जब लोक सेवक द्वारा वह शपथ लेने के लिए सम्यक् रूप से अपेक्षित किया जाता है। | छह मास के लिए सादा कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 179 | सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार करना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 180 | लोक सेवक से किए गए कथन पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना जब वह वैसा करने के लिए वैध रूप से अपेक्षित है। | तीन मास के लिए सादा कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 181 | लोक सेवक से शपथ पर जानते हुए सत्य के रूप में ऐसा कथन करना जो मिथ्या है । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 182 | किसी लोक सेवक को इस आशय से मिथ्या इत्तिला देना कि वह अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग दूसरे व्यक्ति को क्षति या क्षोभ करने के लिए करे । | छह मास के लिए कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 183 | लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा सम्पत्ति लिए जाने का प्रतिरोध । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 184 | लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई सम्पत्ति के विक्रय में बाधा उपस्थित करना । | एक मास के लिए कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 146 | |||||
| 185 | विधिपूर्वक प्राधिकृत विक्रय में सम्पत्ति के लिए ऐसे व्यक्ति का, जो उसे क्रय करने के लिए किसी विधिक असमर्थता के अधीन है, बोली लगाना या उपगत बाध्यताओं को पूरा करने का आशय न रखते हुए बोली लगाना । | एक मास के लिए कारावास, या दो सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 186 | लोक सेवक के लोक कृत्यों के निर्वहन में बाधा डालना । | तीन मास के लिए कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 187 | लोक सेवक की सहायता करने का लोप जब ऐसी सहायता देने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो । | एक मास के लिए सादा कारावास, या दो सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| ऐसे लोक सेवक की, जो आदेशिका के निष्पादन, अपराधों के निवारण आदि के लिए सहायता मांगता है, सहायता देने में जानबूझकर उपेक्षा करना । | छह मास के लिए सादा कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 188 | लोक सेवक द्वारा विधिपूर्वक प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा, यदि ऐसी अवज्ञा विधिपूर्वक नियोजित व्यक्तियों को बाधा, क्षोभ या क्षतिकारित करे । | एक मास के लिए सादा कारावास, या दो सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि ऐसी अवज्ञा मानव जीवन, स्वास्थ्य या क्षेम आदि को संकट कारित करे। | छह मास के लिए कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 189 | किसी पदीय कृत्य को करने या करने से प्रविरत रहने के लिए लोक सेवक को उप्रेरित करने के लिए लोक सेवक या उसको जिसमें वह हितबद्ध है क्षति करने की धमकी देना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 190 | क्षति के संरक्षण के लिए वैध आवेदन देने से विरत रहने के लिए किसी व्यक्ति को उप्रेरित करने के लिए उसे धमकी देना । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| अध्याय 11—मिथ्या साक्ष्य और लोक न्याय के विरुद्ध अपराध | |||||
| 193 | न्यायिक कार्यवाही में मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना। | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | असंज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| किसी अन्य मामले में मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना। | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट | |
| 194 | किसी व्यक्ति की मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| यदि निर्दोष व्यक्ति उसके द्वारा दोषसिद्ध किया जाता है और उसे फांसी दे दी जाती है। | मृत्य या यथा उपर्युक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
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| 195 | आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना । | वही जो उस अपराध के लिए है। | असंज्ञेय | अजमातीय | सेशन न्यायालय । |
| 195क | किसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकाना। | सात वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | वह न्यायालय जिसके द्वारा मिथ्या साक्ष्य देने का अपराध विचारणीय है । |
| यदि निर्दोष व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य के परिणामस्वरूप दोषसिद्ध किया जाता है और मृत्यु या सात वर्ष से अधिक के कारावास से दंडादिष्ट किया जाता है। | वहीं जो अपराध के लिए है। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त] | |
| 196 | उस साक्ष्य को न्यायिक कार्यवाही में काम में लाना जिसका मिथ्या होना या गढ़ा होना ज्ञात है। | वही जो मिथ्या साक्ष्य देने या गढ़ने के लिए है। | [असंज्ञेय] | इसके अनुसार कि ऐसा साक्ष्य देने का अपराध जमानतीय है या अजमानतीय। | वह न्यायालय जिसके द्वारा मिथ्या साक्ष्य देने या गढ़ने का अपराध विचारणीय है । |
| 197 | किसी ऐसे तथ्य से संबंधित मिथ्या प्रमाणपत्र जानते हुए देना या हस्ताक्षरित करना जिसके लिए ऐसा प्रमाणपत्र विधि द्वारा साक्ष्य में ग्राह्य है । | यथोक्त | यथोक्त | जमानतीय | वह न्यायालय जिसके द्वारा मिथ्या साक्ष्य देने का अपराध विचारणीय है । |
| 198 | प्रमाणपत्र को जिसका तात्विक बात के संबंध में मिथ्या होना ज्ञात है, सच्चे प्रमाणपत्र के रूप में काम में लाना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 199 | ऐसी घोषणा में, जो साक्ष्य के रूप में विधि द्वारा ली जा सके, किया गया मिथ्या कथन । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 200 | ऐसी घोषणा का मिथ्या होना जानते हुए सच्ची के रूप में काम में लाना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 201 | किए गए अपराध के साक्ष्य का विलोपन कारित करना या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए उस अपराध के बारे में मिथ्या इत्तिला देना, यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय है । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | इसके अनुसार कि ऐसा अपराध जिसकी बाबत साक्ष्य का विलोपन हुआ है संज्ञेय है या असंज्ञेय । | जमानतीय | सेशन न्यायालय |
| यदि आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास से दंडनीय है । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | असंज्ञेय | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट | |
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| यदि दस वर्ष से कम के कारावास से दंडनीय है। | उस दीर्घतम अवधि की एक चौथाई का कारावास, जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | वह न्यायालय जिसके द्वारा अपराध विचारणीय है। | |
| 202 | इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध यक्ति द्वारा अपराध की इत्तिला देने का साशय लोप । | छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 203 | किए गए अपराध के विषय में मिथ्या इत्तिला देना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, यो दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 204 | साक्ष्य के रूप में किसी दस्तावेज का पेश किया जाना निवारित करने कि लिए उसको छिपाना या नष्ट करना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 205 | वाद या आपराधिक अभियोजन में कोई कार्य या कार्यवाही करने या जमानतदार या प्रतिभू बनने के प्रयोजन के लिए छद्म प्रतिरूपण । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, यो दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 206 | सम्पत्ति को समपहरण के रूप में या दंडादेश के अधीन जुर्माना चुकाने में या डिक्री के निष्पादन में अभिगृहीत किए जाने से निवारित करने के लिए उसे कपटपूर्वक हटाना या छिपाना, आदि। | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, यो दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 207 | सम्पत्ति को समपहरण के रूप में या दंडादेश के अधीन जुर्माना चुकाने में या डिक्री के निष्पादन में लिए जाने से निवारित करने के लिए उस पर अधिकार के बिना दावा करना या उस पर किसी अधिकार के बारे में प्रवंचना करना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 208 | ऐसी राशि के लिए, जो शोध्य न हो, कपटपूर्वक डिक्री होने देना सहन करना या डिक्री का तुष्ट कर दिए जाने के पश्चात् निष्पादित किया जाना सहन करना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 209 | न्यायालय में मिथ्या दावा । | दो वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 210 | ऐसी राशि के लिए, जो शोध्य नहीं है कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना या डिक्री को तुष्ट कर दिए जाने के पश्चात् निष्पादित करवाना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 211 | क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 149 | |||||
| यदि आरोपित अपराध सात वर्ष या उससे अधिक अवधि के कारावास से दंडनीय है । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | असंज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट | |
| यदि आरोपित अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय है । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | सेशन न्यायालय | |
| 212 | अपराधी को संश्रय देना, यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय है । | पांच वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| यदि आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास से दंडनीय है । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| यदि एक वर्ष के लिए, न कि दस वर्ष के लिए कारावास से दंडनीय है। | उस दीर्घतम अवधि की एक चौथाई का और उस भांति का कारावास, जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 213 | अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना, यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय है । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास से दंडनीय है । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| यदि दस वर्ष से कम के लिए कारावास से दंडनीय है । | उस दीर्घतम अवधि की एक चौथाई का कारावास, जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 214 | अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन, यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय है । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास से दंडनीय है । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| यदि दस वर्ष से कम के लिए कारावास से दंडनीय है । | उस दीर्घतम अवधि की एक चौथाई का कारावास, जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
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| 215 | अपराधी को पकड़वाए बिना उस जंगम सम्पत्ति को वापस कराने में सहायता करने के लिए उपहार लेना जिससे कोई व्यक्ति अपराध द्वारा वंचित कर दिया गया है। | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना या दोनों । | संज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 216 | ऐसे अपराधी को संश्रय देना जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय है। | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास से दंडनीय है । | जुर्माना सहित या रहित तीन वर्ष के लिए कारावास । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| यदि एक वर्ष के लिए, न कि दस वर्ष के लिए, कारावास से दंडनीय है । | उस दीर्घतम अवधि की एक चौथाई का कारावास, जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 216क | लुटेरों या डाकुओं को संश्रय देना । | सात वर्ष के लिए कठिन कारावास, और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 217 | लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी सम्पत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा। | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 218 | किसी व्यक्ति को दंड से या किसी सम्पत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 219 | न्यायिक कार्यवाही में लोक सेवक द्वारा ऐसा आदेश, रिपोर्ट, अधिमत या विनिश्चय भ्रष्टता-पूर्वक दिया जाना और सुनाया जाना जिसका विधि के प्रतिकूल होना वह जानता है। | सात वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 220 | प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा, जो वह जानता है कि वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, विचारण के लिए या परिरोध करने के लिए सुपुर्दगी । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 221 | अपराधी को पकड़ने के लिए विधि द्वारा आबद्ध लोक सेवक द्वारा उसे पकड़ने का साशय लोप, यदि अपराध मृत्य से दंडनीय है । | जुर्माना सहित या रहित सात वर्ष के लिए कारावास । | इसके अनुसार कि ऐसा अपराध जिसकी बाबत लोप हुआ है संज्ञेय है या असंज्ञेय । | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 152 | |||||
| (ख) जब लोप या सहन करना उपेक्षापूर्वक है। | दो वर्ष के लिए सादा कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट | |
| 225ख | उन दशाओं में, जिनके लिए अन्यथा उपलब्ध नहीं है, विधिपूर्वक पकड़ने में प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना । | छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 227 | दंड के परिहार की शर्त का अतिक्रमण । | मूल दंडादेश का दंड, या यदि दंड का भाग भोग लिया गया है तो अवशिष्ट भाग । | यथोक्त | अजमानतीय | वह न्यायालय जिसके द्वारा मूल अपराध विचारणीय था । |
| 228 | न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में बैठे हुए लोक सेवक का साशय अपमान या उसके कार्य में विघ्न । | छह मास के लिए सादा कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | अध्याय 26 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, वह न्यायालय जिसमें अपराध किया गया है। |
| 228क | कुछ अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण । | दो वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | संज्ञेय | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| न्यायालय की पूर्व अनुज्ञा के बिना किसी कार्यवाही का मुद्रण या प्रकाशन । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त] | |
| 229 | जूरी-सदस्य या असेसर का प्रतिरूपण । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 229क | जमानत पर या बंधपत्र पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में हाजिर होने में असफलता । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | अजमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट ] |
| अध्याय 12—सिक्के और सरकारी स्टाम्पों से संबंधित अपराध | |||||
| 231 | सिक्के का कूटकरण या उसके कूटकरण की प्रक्रिया के किसी भाग को करना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | संज्ञेय | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 232 | भारतीय सिक्के का कूटकरण या उसके कूटकरण की प्रक्रिया के किसी भाग को करना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | सेशन न्यायालय |
| 233 | सिक्के के कूटकरण के प्रयोजन के लिए उपकरण बनाना, खरीदना या बेचना । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 234 | भारतीय सिक्के के कूटकरण के प्रयोजन के लिए उपकरण बनाना, खरीदना या बेचना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | सेशन न्यायालय |
| PDF पृष्ठ 154 | |||||
| 246 | कपटपूर्वक किसी सिक्के का वजन कम करना या मिश्रण परिवर्तित करना । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 247 | कपटपूर्वक भारतीय सिक्के का वजन कम करना या मिश्रण परिवर्तित करना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 248 | इस आशय से किसी सिक्के का रूप परिवर्तित करना कि वह भिन्न प्रकार के रूप में चल जाए । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 249 | इस आशय से भारतीय सिक्के का रूप परिवर्तित करना कि वह भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 250 | दूसरे को ऐसे सिक्के का परिदान, जो इस ज्ञान के साथ कब्जे में आया है कि उसे परिवर्तित किया गया है। | पांच वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 251 | भारतीय सिक्के का परिदान, जो इस ज्ञान के साथ कब्जे में आया है कि उसे परिवर्तित किया गया है। | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | सेशन न्यायालय |
| 252 | ऐसे व्यक्ति द्वारा परिवर्तित सिक्के, पर कब्जा जो उसका परिवर्तित होना उस समय जानता था जब वह उसके कब्जे में आया । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 253 | ऐसे व्यक्ति द्वारा भारतीय सिक्के पर कब्जा जो उसका परिवर्तित होना उस समय जानता था जब वह उसके कब्जे में आया । | पांच वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 254 | दूसरे सिक्के का असली सिक्के के रूप में परिदान जिसका परिदान करने वाला उस समय जब वह उसके कब्जे में पहली बार आया था उसका परिवर्तित होना नहीं जानता था। | दो वर्ष के लिए कारावास, या सिक्के के मूल्य का दस गुना जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 255 | सरकारी स्टाम्प का कूटकरण । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | सेशन न्यायालय |
| 256 | सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के प्रयोजन के लिए उपकरण या सामग्री कब्जे में रखना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 257 | सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के प्रयोजन के लिए उपकरण बनाना या खरीदना या बेचना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 258 | कूटकृत सरकारी स्टाम्प का विक्रय । | यथोक्त | यथोक्त | जमानतीय | यथोक्त |
| 259 | कूटकृत सरकारी स्टाम्प को कब्जे में रखना । | यथोक्त | यथोक्त | जमानतीय | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 155 | |||||
| 260 | किसी सरकारी स्टाम्प को कूटकृत जानते हुए उसे असली स्टाम्प के रूप में उपयोग में लाना । | सात वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 261 | इस आशय से कि सरकार को हानि कारित हो, उस पदार्थ पर से, जिस पर सरकारी स्टाम्प लगा हुआ है, लेख मिटाना या दस्तावेज से वह स्टाम्प हटाना जो उसके लिए उपयोग में लाया गया है। | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 262 | ऐसे सरकारी स्टाम्प का उपयोग जिसके बारे में ज्ञात है कि उसका पहले उपयोग हो चुका हो । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 263 | स्टाम्प के उपयोग किए जा चुकने के द्योतक चिह्न को छील-कर मिटाना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 263क | बनावटी स्टाम्प | दो सौ रुपए का जुर्माना | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| अध्याय 13—बाटों और मापों से संबंधित अपराध | |||||
| 264 | तोलने के लिए खोटे उपकरण का कपटपूर्वक उपयोग । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 265 | खोटे बाट या माप का कपटपूर्वक उपयोग। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 266 | खोटे बाटों या मापों को कपटपूर्वक उपयोग के लिए कब्जे में रखना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 267 | खोटे बाटों या मापों को कपटपूर्वक उपयोग के लिए बनाना या बेचना । | यथोक्त | संज्ञेय | अजमानतीय | यथोक्त |
| अध्याय 14—लोक स्वास्थ्य क्षेम, सुविधा, शिष्टता और सदाचार पर प्रभाव डालने वाले अपराध | |||||
| 269 | उपेक्षा से कोई ऐसा कार्य करना जिसके बारे में ज्ञात है कि उससे जीवन के लिए संकटपूर्ण किसी रोग का संक्रम फैलना संभाव्य है । | छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 270 | परिद्वेष से ऐसा कोई कार्य करना जिसके बारे में ज्ञात है कि उससे जीवन के लिए संकटपूर्ण किसी रोग का संक्रम फैलना संभाव्य है । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 271 | किसी करन्तीन के नियम की जानते हुए अवज्ञा। | छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 272 | विक्रय के लिए आशयित खाद्य या पेय का ऐसा उपमिश्रण जिसमें वह अपायकर बन जाए । | छह मास के लिए कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 273 | खाद्य और पेय के रूप में किसी खाद्य और पेय को, यह जानते हुए कि वह अपायकर है, बेचना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 156 | |||||
| 274 | विक्रय के लिए आशयित किसी ओषधि या भेषजीय निर्मित का ऐसा अपमिश्रण जिससे उसकी प्रभावकारिता कम हो जाए या उसकी क्रिया बदल जाए या वह अपायकर हो जाए। | छह मास के लिए कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | [अजमानतीय] | कोई मजिस्ट्रेट |
| 275 | किसी ओषधि या भेषजीय निर्मिति को जिसके बारे में ज्ञात है कि वह अपमिश्रित है बेचने की प्रस्थापना करना या ओषधालय से देना । | यथोक्त | यथोक्त | [जमानतीय] | यथोक्त |
| 276 | किसी ओषधि या भेषजीय निर्मिति को भिन्न ओषधि या भेषजीय निर्मिति के रूप में, जानते हुए, बेचना या ओषधालय से देना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 277 | लोक जल-स्रोत या जलाशय का जल कलुषित करना । | तीन मास के लिए कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 278 | वायुमंडल को स्वास्थ्य के लिए अपायकर बनाना । | पांच सौ रुपए का जुर्माना। | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 279 | लोक मार्ग पर ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से वाहन चलाना या सवार होकर हांकना जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाए, आदि। | छह मास के लिए कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 280 | किसी जलयान को ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से चलाना जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाए, आदि। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 281 | भ्रामक प्रकाश चिह्न या बोये का प्रदर्शन । | सात वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 282 | जल द्वारा किसी व्यक्ति का भाड़े पर प्रवहण जब वह जलयान ऐसी दशा में हो या इतना लदा हुआ हो कि उससे उस व्यक्ति का जीवन संकटापन्न हो जाए। | छह मास के लिए कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 283 | किसी लोक मार्ग या नौपरिवहन-पथ में संकट, बाधा या क्षति कारित करना । | दो सौ रुपए का जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 284 | किसी विषैले पदार्थ से ऐसे बरतना जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाए, आदि। | छह मास के लिए कारावास, या एक हजार रुपए जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 285 | अग्नि या किसी ज्वलनशील पदार्थ से ऐसे बरतना जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाए, आदि। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 157 | |||||
| 286 | किसी विस्फोटक पदार्थ से उसी प्रकार बरतना। | छह मास के लिए कारावास, या एक हजार रुपए जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 287 | किसी मशीनरी से उसी प्रकार बरतना। | यथोक्त | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 288 | जिस निर्माण को गिराने या जिसकी मरम्मत करने का हक प्रदान करने वाला किसी व्यक्ति को अधिकार है उसके गिरने से मानव जीवन को अधिसंभाव्य संकट से बचाने का उस व्यक्ति द्वारा लोप। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 289 | अपने कब्जे में के किसी जीवजन्तु के संबंध में ऐसी व्यवस्था करने का किसी व्यक्ति द्वारा लोप जिससे ऐसे जीवजन्तु से मानव जीवन को संकट या घोर उपहति के संकट से बचाव हो । | यथोक्त | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 290 | लोक न्यूसेंस करना । | दो सौ रुपए का जुर्माना । | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 291 | न्यूसेंस बंद करने के व्यादेश के पश्चात् उसका चालू रखना । | छह मास के लिए सादा कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 292 | अश्लील पुस्तकों, आदि का विक्रय, आदि। | प्रथम दोषसिद्धि पर दो वर्ष के लिए कारावास और दो हजार रुपए का जुर्माना, और द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर, पांच वर्ष के लिए कारावास और पांच हजार रुपए का जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 293 | तरुण व्यक्तियों को अश्लील वस्तुओं का विक्रय आदि। | प्रथम दोषसिद्धि पर तीन वर्ष के लिए कारावास और दो हजार रुपए का जुर्माना, और द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर, सात वर्ष के लिए कारावास और पांज हजार रुपए का जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 294 | अश्लील गाने । | तीन मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 294क | लाटरी कार्यालय रखना । | छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 158 | |||||
| लाटरी संबंधी प्रस्थापनाओं का प्रकाशन । | एक हजार रुपए का जुर्माना । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट | |
| अध्याय 15—धर्म से संबंधित अपराध | |||||
| 295 | व्यक्तियों के किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान अथवा किसी पवित्र वस्तु को नष्ट, नुकसान-ग्रस्त या अपवित्र करना। | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | अजमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 295क | किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का विद्वेषतः अपमान । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 296 | धार्मिक उपासना में लगे हुए जमाव में विघ्न कारित करना । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 297 | किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना स्थान या कब्रस्थान में अतिचार करना या अंत्येष्टि में विघ्न कारित करना या मानव शव की अवहेलना करना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 298 | किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आशय से उनकी श्रवणगोचरता में कोई शब्द उच्चारित करना या कोई ध्वनि करना अथवा उसकी दृष्टिगोचरता में कोई अंगविक्षेप करना या कोई वस्तु रखना । | यथोक्त | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| अध्याय 16—मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाला अपराध | |||||
| 302 | हत्या । | मृत्यु, या आजीवन कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| 303 | आजीवन कारावास के दंडादेश के अधीन व्यक्ति द्वारा हत्या । | मृत्यु । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 304 | हत्या की कोटि में न आने वाला आपराधिक मानववध, यदि वह कार्य, जिसके द्वारा मृत्यु कारित की गई, मृत्यु आदि कारित करने के आशय से किया जाता है। | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि वह कार्य इस ज्ञान के साथ कि उससे मृत्यु कारित करना संभाव्य है, किन्तु मृत्यु आदि कारित करने के आशय के बिना, किया जाता है। | दस वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 304क | उतावलेपन के या उपेक्षापूर्ण कार्य से मृत्यु कारित करना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
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| 304ख | दहेज मृत्यु । | कम से कम सात वर्ष के लिए कारावास किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा । | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय] |
| 305 | शिशु या उन्मत या विपर्यस्तचित व्यक्ति या जड़ व्यक्ति या मत्तता की अवस्था में व्यक्ति द्वारा आत्महत्या किए जाने का दुष्प्रेरण । | मृत्यु, या आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 306 | आत्महत्या किए जाने का दुष्प्रेरण । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 307 | हत्या करने का प्रयत्न । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो जाए। | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| आजीवन सिद्धदोष द्वारा हत्या का प्रयत्न, यदि उपहति कारित हो जाए । | मृत्यु या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 308 | आपराधिक मानववध करने का प्रयत्न । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि ऐसे कार्य द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो जाए। | सात वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 309 | आत्महत्या करने का प्रयत्न । | एक वर्ष के लिए सादा कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 311 | ठग होना । | आजीवन कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| 312 | गर्भपात कारित करना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| यदि स्त्री स्पन्दनगर्भा हो । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 313 | स्त्री की सम्मति के बिना गर्भपात कारित करना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
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| 314 | गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्य द्वारा कारित मृत्यु । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय । |
| यदि वह कार्य स्त्री की सम्मति के बिना किया जाता है । | आजीवन कारावास या यथा उपर्युक्त । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 315 | शिशु का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मृत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य । | दस वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 316 | ऐसे कार्य द्वारा, जो आपराधिक मानववध की कोटि में आता है, किसी अजीव अजात् शिशु की मृत्यु कारित करना । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 317 | शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के शिशु को पूर्णतया परित्याग करने के आशय से अरक्षित डाल देना । | सात वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 318 | मृत शरीर के गुप्त व्ययन द्वारा जन्म छिपाना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 323 | स्वेच्छया उपहति कारित करना । | एक वर्ष के लिए कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 324 | खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | [अजमानतीय] | यथोक्त |
| 325 | स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | [जमानतीय] | यथोक्त |
| 326 | खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 326 | अम्ल, आदि का प्रयोग करके स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना । | कम से कम दस वर्ष के लिए कारावास किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना, जिसका संदाय पीड़ित को किया जाएगा । | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय । । |
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| 326ख | स्वेच्छया अम्ल फेंकना या फेंकने का प्रयत्न करना । | पांच वर्ष के लिए कारावास किंतु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय । ।] |
| 327 | सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति उद्दापित करने के लिए अथवा कोई बात, जो अवैध है या जिससे अपराध किया जाना सुकर होता हो, करने के लिए मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 328 | उपहति कारित करने के आशय से जरिमाकारी ओषधि देना, आदि। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 329 | सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति उद्दापित करने के लिए अथवा कोई बात, जो अवैध है या जिससे अपराध का किया जाना सुकर होता हो, करने के लिए मजबूर करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 330 | संस्वीकृति या जानकारी उद्दापित करने के लिए अथवा सम्पत्ति प्रत्यावर्तित करने के लिए मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना, आदि। | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 331 | संस्वीकृति या जानकारी उद्दापित करने के लिए अथवा सम्पत्ति प्रत्यावर्तित करने के लिए मजबूर करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना, आदि। | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| 332 | लोक सेवक को अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | [यथोक्त] | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 333 | लोक सेवक को अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | [यथोक्त] | सेशन न्यायालय |
| 334 | प्रकोपन देने वाले व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति को उपहति करने का आशय न रखते हुए गंभीर और अचानक प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति कारित करना । | एक मास के लिए कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 335 | प्रकोपन देने वाले व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति को उपहति करने का आशय न रखते हुए गंभीर और अचानक प्रकोपन पर घोर उपहति कारित करना । | चार वर्ष के लिए कारावास, या दो हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| PDF पृष्ठ 162 | |||||
| 336 | कोई कार्य करना जिससे मानव जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो । | तीन मास के लिए कारावास, या ढाई सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 337 | ऐसे कार्य द्वारा घोर उपहति कारित करना जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो, आदि। | छह मास के लिए कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 338 | ऐसे कार्य द्वारा घोर उपहति कारित करना जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो, आदि। | दो वर्ष के लिए कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 341 | किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करना। | एक मास के लिए सादा कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 342 | किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध। | एक वर्ष के लिए कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 343 | तीन या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध। | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 344 | दस या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध। | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 345 | किसी व्यक्ति को यह जानते हुए सदोष परिरोध में रखना कि उसको छोड़ने के लिए रिट निकल चुका है। | किसी अन्य धारा के अधीन कारावास के अतिरिक्त दो वर्ष के लिए कारावास । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 346 | गुप्त स्थान में सदोष परिरोध । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 347 | सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य करने के लिए मजबूर करने आदि के प्रयोजन के लिए सदोष परिरोध। | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 348 | संस्वीकृति या जानकारी उद्दापित करने या सम्पत्ति आदि को प्रत्यावर्तित करने के लिए विवश करने आदि के प्रयोजन के लिए सदोष परिरोध । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 352 | गंभीर प्रकोपन होने से अन्यथा हमला या आपराधिक बल का प्रयोग । | तीन मास के लिए कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 353 | लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से भयोपरत करने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग । | दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | [अजमानतीय] | कोई मजिस्ट्रेट । |
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| 354 | स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग | एक वर्ष के लिए कारावास, जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट । |
| 354क | अवांछनीय शारीरिक संस्पर्श और अग्रक्रियाएं अथवा लैंगिक संबंधों की स्वीकृति की कोई मांग या अनुरोध करने, अश्लील साहित्य दिखाने की प्रकृति का लैंगिक उत्पीड़न । | कारावास, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माना या दोनों । | संज्ञेय | जमानतीय | यथोक्त |
| लैंगिक आभासी टिप्पणीयां करने की प्रकृति का लैंगिक उत्पीड़न | कारावास, जो एक वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माना या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त | |
| 354 | विवस्त्र करने के आशय से स्त्री पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग । | कम से कम तीन वर्ष के लिए कारावास, किंतु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | यथोक्त |
| 354ग | दृश्यरतिकता । | प्रथम दोषसिद्धि के लिए कम से कम एक वर्ष के लिए कारावास, किंतु जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना । | संज्ञेय | जमानतीय | यथोक्त |
| द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि के लिए कम से कम तीन वर्ष के लिए कारावास किंतु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | यथोक्त | ||
| 354घ | पीछा करना । | प्रथम दोषसिद्धि के लिए तीन वर्ष तक के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | जमानतीय | यथोक्त |
| द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि के लिए पांच वर्ष तक के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | यथोक्त] | ||
| 355 | गंभीर और अचानक प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का निरादर करने के आशय के उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | यथोक्त |
| 356 | किसी व्यक्ति द्वारा पहनी हुई या ले जाई जाने वाली सम्पत्ति की चोरी के प्रयत्न में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग । | यथोक्त | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 164 | |||||
| 357 | किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्न में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग । | एक वर्ष के लिए कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट । |
| 358 | गंभीर और अचानक प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग । | एक मास के लिए सादा कारावास, या दो सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 363 | व्यपहरण। | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 363क | अप्राप्तवय का इसलिए व्यपहरण या अप्राप्तवय की अभिरक्षा इसलिए अभिप्राप्त करना कि ऐसा अप्राप्तवय भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए। | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | अजमानतीय | यथोक्त |
| अप्राप्तवय को इसलिए विकलांग करना कि ऐसा अप्राप्तवय भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए । | आजीवन कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | सेशन न्यायालय | |
| 364 | हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 364क | फिरोती, आदि के लिए व्यपहरण । | मृत्यु या आजीवन कारावास, और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त] |
| 365 | किसी व्यक्ति का गुप्त रीति से और सदोष परिरोध करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 366 | किसी स्त्री को विवाह करने के लिए विवश करने या भ्रष्ट करने आदि के लिए उसे व्यपहृत या अपहृत करना। | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | सेशन न्यायालय |
| 366क | अप्राप्तवय लड़की का उपापन । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 366ख | विदेश से लड़की का आयात करना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 367 | किसी व्यक्ति को घोर उपहति, दासत्व, आदि का विषय बनाने के उद्देश्य से व्यपहरण या अपहरण । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 368 | व्यपहृत व्यक्ति को छिपाना या परिरोध में रखना । | व्यपहरण या अपहरण के लिए दंड । | यथोक्त | यथोक्त | वह न्यायालय जिसके द्वारा व्यपहरण या अपहरण विचारणीय है । |
| 369 | किसी शिशु के शरीर पर से सम्पत्ति लेने के आशय से उस शिशु का व्यपहरण या अपहरण । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| PDF पृष्ठ 165 | |||||
| 370 | व्यक्ति का दुर्व्यापार । | कम से कम सात वर्ष के लिए कारावास, किंतु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| एक से अधिक व्यक्तियों का दुर्व्यापार । | कम से कम दस वर्ष के लिए कारावास, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| किसी अवयस्क का दुर्व्यापार । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| एक से अधिक अवयस्कों का दुर्व्यापार । | कम से कम चौदह वर्ष के लिए कारावास किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| व्यक्ति को एक से अधिक अवसरों पर अवयस्क के दुर्व्यापार के अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया जाना । | आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवन-काल का कारावास अभिप्रेत होगा और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| लोक सेवक या किसी पुलिस अधिकारी का अवयस्क के दुर्व्यापार में अंतर्वलित होना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 370क | ऐसे किसी बालक का शोषण, जिसका दुर्व्यापार किया गया है । | कम से कम पांच वर्ष के लिए कारावास, किंतु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| ऐसे किसी व्यक्ति का शोषण, जिसका दुर्व्यापार किया गया है । | कम से कम तीन वर्ष के लिए कारावास, किंतु जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त] | |
| 371 | दासों का आभ्यासिक व्यौहार करना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 372 | वेश्यावृत्ति, आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय को बेचना या भाड़े पर देना । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 373 | उन्हीं प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय को खरीदना या उसका कब्जा अभिप्राप्त करना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 166 | |||||
| 374 | विधिविरुद्ध अनिवार्य श्रम । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 376 | बलात्संग । | कम से कम सात वर्ष के लिए कठोर कारावास, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना । | यथोक्त | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या किसी लोक सेवक या सशस्त्र बलों के सदस्य द्वारा या किसी जेल, प्रतिप्रेषण-गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान या स्त्रियों या बालकों की किसी संस्था के प्रबंधतंत्र या कर्मचारिवृंद में के किसी व्यक्ति द्वारा या किसी अस्पताल के प्रबंधतंत्र या कर्मचारिवृंद में के किसी व्यक्ति द्वारा बलात्संग और उस व्यक्ति के प्रति, जिससे बलात्संग किया गया है न्यास या प्राधिकारी की स्थिति में किसी व्यक्ति द्वारा या उस व्यक्ति के, जिससे बलात्संग किया गया है, किसी निकट नातेदार द्वारा किया गया बलात्संग । | कम से कम दस वर्ष के लिए कठोर कारावास, किंतु जो आजीवन कारावास, तक का हो सकेगा जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल का कारावास अभिप्रेत होगा और जुर्माना | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 376क | बलात्संग का अपराध करने और ऐसी क्षति पहुंचाने वाला व्यक्ति जिससे स्त्री की मृत्यु कारित हो जाती है या उसकी लगातार विकृतशील दशा हो जाती है । | कम से कम बीस वर्ष के लिए कठोर कारावास, किंतु जो आजीवन कारावास, तक का हो सकेगा जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवन काल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा या मृत्युदंड । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 376ख | पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ पृथक्ककरण के दौरान मैथुन । | कम से कम दो वर्ष के लिए कारावास, किंतु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना । | संज्ञेय (किंतु केवल पीड़िता द्वारा परिवाद करने पर) | जमानतीय | यथोक्त |
| 376ग | प्राधिकार में किसी व्यक्ति द्वारा मैथुन । | कम से कम पांच वर्ष के लिए कठोर कारावास किंतु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा | संज्ञेय | अजमानतीय | यथोक्त |
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| 376घ | सामूहिक बलात्संग | कम से कम बीस वर्ष के लिए कठोर कारावास, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, और जुर्माना, जिसका संदाय पीड़िता को किया जाएगा । | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| 376ङ | पुनरावृत्तिकर्ता अपराधी | आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा या मृत्युदंड । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त] |
| 377 | प्रकृति विरुद्ध अपराध । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट] |
| अध्याय 17—सम्पत्ति के विरुद्ध अपराध | |||||
| 379 | चोरी । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | अजमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 380 | निर्माण, तम्बू या जलयान में चोरी । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 381 | लिपिक या सेवक द्वारा स्वामी के या नियोक्ता के कब्जे की सम्पत्ति की चोरी । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 382 | चोरी करने के लिए या उसके करने के पश्चात् निकल भागने के लिए या उसके द्वारा ली गई सम्पत्ति को रखे रखने के लिए मृत्यु या उपहति कारित करने या अवरोध कारित करने अथवा मृत्यु या उपहति या अवरोध का भय कारित करने की तैयारी के पश्चात्, चोरी । | दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट | |
| 384 | उद्दापन। | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 385 | उद्दापन करने के लिए क्षति के भय में डालना या डालने का प्रयत्न करना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | यथोक्त |
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| 386 | किसी व्यक्ति को मृत्यु या घोर उपहति के भय में डालकर उद्दापन । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 387 | उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को मृत्यु या घोर उपहति के भय में डालना या डालने का प्रयत्न करना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 388 | मृत्यु, आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास से दंडनीय अपराध का अभियोग लगाने की धमकी देकर उद्दापन। | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | जमानतीय | यथोक्त |
| यदि वह अपराध, जिसकी धमकी दी गई हो, प्रकृति विरुद्ध अपराध हो । | आजीवन कारावास | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 389 | उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को मृत्यु, आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास से दंडनीय अपराध का अभियोग लगाने के भय में डालना । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि अपराध प्रकृति विरुद्ध अपराध है । | आजीवन कारावास | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 392 | लूट। | दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | अजमानतीय | यथोक्त |
| यदि राजमार्ग पर सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच की जाती है। | चौदह वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 393 | लूट करने का प्रयत्न । | सात वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 394 | लूट करने में या करने के प्रयत्न में व्यक्ति का या ऐसी लूट में संयुक्त तौर से सम्पृक्त किसी अन्य व्यक्ति का स्वेच्छया उपहति करना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 395 | डकैती । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 397 | मृत्यु, या घोर उपहति कारित करने के प्रयत्न के साथ लूट या डकैती । | सात वर्ष से कम न होने वाला कठिन कारावास । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 398 | घातक आयुध से सज्जित होकर लूट या डकैती करने का प्रयत्न । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 399 | डकैती करने के लिए तैयारी करना । | दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 400 | अभ्यासतः डकैती करने के प्रयोजन से सहयुक्त व्यक्तियों की टोली का होना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 401 | अभ्यासतः चोरी करने के लिए सहयुक्त व्यक्तियों की घूमती-फिरती टोली का होना । | सात वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
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| 402 | डकैती करने के प्रयोजन के लिए एकत्रित पांच या अधिक व्यक्तियों में से एक होना । | सात वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| 403 | जंगम संपत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग या उसे अपने उपयोग के लिए संपरिवर्तित कर लेना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 404 | किसी सम्पत्ति का, यह जानते हुए बेईमानी से दुर्विनियोग कि वह मृत व्यक्ति के कब्जे में उसकी मृत्यु के समय थी और तब से वह उसके वैध रूप से हकदार व्यक्ति के कब्जे में नहीं रही है। | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 405 | यदि वह अपराध मृत व्यक्ति द्वारा नियोजित लिपिक या व्यक्ति द्वारा किया जाता है। | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | असंज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 406 | आपराधिक न्यासभंग । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | अजमानतीय | यथोक्त |
| 407 | वाहक, घाटवाल, आदि द्वारा आपराधिक न्यासभंग । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 408 | लिपिक या सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 409 | लोक सेवक द्वारा या बैंकर, व्यापारी या अभिकर्ता, आदि द्वारा आपराधिक न्यासभंग । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 411 | चुराई हुई संपत्ति को उसे चुराई हुई जानते हुए बेईमानी से प्राप्त करना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 412 | चुराई हुई सम्पत्ति को यह जानते हुए कि वह डकैती द्वारा प्राप्त की गई है, अभिप्रात करना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | सेशन न्यायालय |
| 413 | चुराई हुई सम्पत्ति का अभ्यासतः व्यापार करना। | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 414 | चुराई हुई सम्पत्ति को, यह जानते हुए कि वह चुराई हुई है, छिपाने में या व्ययनित करने में सहायता करना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 417 | छल । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | यथोक्त |
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| 418 | उस व्यक्ति से छल करना जिसका हित संरक्षित रखने के लिए अपराधी या तो विधि द्वारा या वैध संविदा द्वारा आबद्ध था। | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 419 | प्रतिरूपेण द्वारा छल । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 420 | छल करना और तद्द्वारा सम्पत्ति परिदत्त करने के लिए बेईमानी से उप्रेरित करना अथवा तद्द्वारा बेईमानी से मूल्यवान प्रतिभूति को रच देना, परिवर्तित कर देना या नष्ट कर देना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 421 | लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए सम्पत्ति का कपटपूर्वक अपसारण या छिपाना, आदि । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 422 | अपराधी का अपने को शोध्य ऋण या मांग का लेनदारों के लिए उपलब्ध किया जाना कपटपूर्वक निवारित करना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 423 | अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अंतर्विष्ट है, कपटपूर्वक निष्पादन । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 424 | अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की सम्पत्ति का कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना अथवा उसके करने में सहायता करना अथवा जिस मांग या दावे का वह हकदार है उसे बेईमानी से छोड़ देना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 426 | रिष्टि। | तीन मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 427 | रिष्टि और तद्द्वारा पचास रुपए या उससे अधिक रकम का नुकसान कारित करना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 428 | दस रुपए या उससे अधिक मूल्य के किसी जीव-जन्तु को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि। | यथोक्त | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 429 | किसी मूल्य के हाथी, ऊंट, घोड़े, आदि को अथवा पचास रुपए या उससे अधिक मूल्य के किसी भी अन्य जीव-जन्तु को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि। | पांच वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 430 | कृषिक प्रयोजनों, आदि के लिए जल प्रदाय में कमी कारित करने द्वारा रिष्टि। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 171 | |||||
| 431 | लोक सड़क, पुल, नाव्य नदी अथवा नाव्य जल सरणी को क्षति पहुंचाने और उसे यात्रा या संपत्ति प्रवहण के लिए अगम्य या कम निरापद बना देने द्वारा रिष्टि। | पांच वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 432 | लोक जलनिकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 433 | किसी दीपगृह या समुद्री चिह्न को नष्ट करने या हटाने या कम उपयोगी बनाने अथवा किसी मिथ्या प्रकाश को प्रदर्शित करने द्वारा रिष्टि। | सात वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 434 | लोक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए भूमि चिह्न को नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि। | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 435 | सौ रुपए या उससे अधिक का, अथवा कृषि उपज की दशा में दस रुपए या उससे अधिक का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि। | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 436 | गृह, आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि। | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| 437 | तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि। | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 438 | पिछली धारा में वर्णित रिष्टि जब अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई हो । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 439 | चोरी आदि करने के आशय से से जलयान व किनारे पर चढ़ा देना । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 440 | मृत्यु या उपहति कारित करने, आदि के लिए की गई तैयारी के पश्चात् की गई रिष्टि। | पांच वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 447 | आपराधिक अतिचार। | तीन मास के लिए कारावास, या पांच सौ रुपए का जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 448 | गृह-अतिचार । | एक वर्ष के लिए कारावास, या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 172 | |||||
| 449 | मृत्यु से दंडनीय अपराध को करने के लिए गृह-अतिचार। | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना। | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| 450 | आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गृह-अतिचार । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 451 | कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गृह-अतिचार। | दो वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| यदि वह अपराध चोरी है । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | अजमानतीय | यथोक्त | |
| 452 | उपहति कारित करने, हमला करने, आदि की तैयारी के पश्चात् गृह-अतिचार । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 453 | प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन । | दो वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 454 | कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| यदि वह अपराध चोरी है । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट | |
| 455 | उपहति कारित करने, हमला, आदि की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 456 | रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 457 | कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन । | पांच वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| यदि वह अपराध चोरी है । | चौदह वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 458 | उपहति कारित करने, आदि की तैयारी के पश्चात् रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 459 | प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करते समय कारित घोर उपहति । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | सेशन न्यायालय |
| 460 | रात्रौ गृह-भेदन, आदि में संयुक्ततः सम्पृक्त समस्त व्यक्तियों में से एक द्वारा कारित मृत्यु या घोर उपहति । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 173 | |||||
| 461 | ऐसे बंद पात्र को, जिसमें सम्पत्ति है या समझी जाती है, बेईमानी से तोड़ कर खोलना या उपबंधित करना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | संज्ञेय | अजमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 462 | ऐसे बंद पात्र को, जिसमें सम्पत्ति है या समझी जाती है, न्यस्त किए जाने पर कपटपूर्वक खोलना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | यथोक्त |
| अध्याय 18—दस्तावेजों और सम्पत्ति चिह्नों संबंधी अपराध | |||||
| 465 | कूटरचना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 466 | न्यायालय के अभिलेख या जन्मों के रजिस्टर आदि की, जो लोक सेवक द्वारा रखा जाता है, कूटरचना । | सात वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | अजमानतीय | यथोक्त |
| 467 | मूल्यवान प्रतिभूति, विल या किसी मूल्यवान प्रतिभूति की रचना या अन्तरण के प्राधिकार, अथवा किसी धन आदि को प्राप्त करने के प्राधिकार की कूटरचना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| जब मूल्यवान प्रतिभूति केन्द्रीय सरकार का वचनपत्र है। | यथोक्त | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त | |
| 468 | छल के प्रयोजन के लिए कूटरचना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 469 | किसी व्यक्ति की ख्याति को अपहानि पहुंचाने के प्रयोजन से या यह संभाव्य जानते हुए कि इस प्रयोजन से उसका उपयोग किया जाएगा, की गई कूटरचना । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 471 | कूटरचित दस्तावेज को, जिसके बारे में ज्ञात है कि वह कूटरचित है, असली के रूप में उपयोग में लाना । | ऐसी दस्तावेज की कूटरचना के लिए दंड । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| जब कूटरचित दस्तावेज केन्द्रीय सरकार का वचनपत्र है। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 472 | भारतीय दंड संहिता की धारा 467 के अधीन दंडनीय कूटरचना करने के आशय से, मुद्रा, पट्टी, आदि बनाना या उनकी कूटकृति तैयार करना अथवा किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी, आदि को, उसे कूटकृत जानते हुए, वैसे आशय से अपने कब्जे में रखना । | आजीवन कारावास, या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 473 | भारतीय दंड संहिता की धारा 467 के अन्यथा दंडनीय कूटरचना करने के आशय से, मुद्रा, पट्टी, आदि बनाना या उनकी कूटकृति करना अथवा किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी, आदि को, उसे कूटकृत जानते हुए, वैसे आशय से अपने कब्जे में रखना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 174 | |||||
| 474 | किसी दस्तावेज को, उसे कूट-रचित जानते हुए इस आशय से कि उसे असली के रूप में उपयोग में लाया जाए अपने कब्जे में रखना, यदि वह दस्तावेज भारतीय दंड संहिता की धारा 466 में वर्णित भांति की हो । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| यदि वह दस्तावेज भारतीय दंड संहिता की धारा 467 में वर्णित भांति की हो । | आजीवन कारावास, या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त | |
| 475 | भारतीय दंड संहिता की धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिह्न युक्त पदार्थ को कब्जे में रखना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 476 | भारतीय दंड संहिता की धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिह्न युक्त पदार्थ को कब्जे में रखना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | अजमानतीय | यथोक्त |
| 477 | विल, आदि को कपटपूर्वक नष्ट या विरूपित करना या उसे नष्ट या विरूपित करने का प्रयत्न करना, या छिपाना। | आजीवन कारावास या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | असंज्ञेय | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 477क | लेखा का मिथ्याकरण । | सात वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | यथोक्त |
| 482 | मिथ्या सम्पत्ति चिह्न का इस आशय से उपयोग करना कि किसी व्यक्ति को प्रवंचित करे या क्षति करे । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 483 | अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का इस आशय से कूटकरण कि नुकसान क्षति कारित हो । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 484 | लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का या किसी सम्पत्ति के विनिर्माण, क्वालिटी आदि का द्योतन करने वाले किसी चिह्न का, जो लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाया जाता हो, कूटकरण । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना। | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 485 | किसी लोक या प्राइवेट सम्पत्ति चिह्न के कूटकरण के लिए कोई डाई, पट्टी, या अन्य उपकरण कपटपूर्वक बनाना या अपने कब्जे में रखना । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| PDF पृष्ठ 175 | |||||
| 486 | कूटकृत सम्पत्ति चिह्न से चिह्नित माल का जानते हुए विक्रय । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 487 | किसी पैकेज या पात्र पर, जिसमें माल रखा हुआ हो, इस आशय से मिथ्या चिह्न कपटपूर्वक बनाना कि यह विश्वास कारित हो जाए कि उसमें ऐसा माल है जो उसमें नहीं है, आदि। | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 488 | किसी ऐसे मिथ्या चिह्न का उपयोग करना। | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 489 | क्षति कारित करने के आशय से किसी सम्पत्ति चिह्न को मिटाना, नष्ट करना या विरूपित करना । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 489क | करेंसी नोटों या बैंक नोटों का कूटकरण । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| 489ख | कूटरचित या कूटकृत करेंसी नोटों या बैंक नोटों को असली के रूप में उपयोग में लाना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 489ग | कूटरचित या कूटकृत करेंसी नोटों या बैंक नोटों को कब्जे में रखना । | सात वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | जमानतीय | यथोक्त |
| 489घ | करेंसी नोटों या बैंक नोटों की कूटरचना या कूटकरण के लिए मशीनरी, उपकरण या सामग्री बनाना या कब्जे में रखना । | आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | अजमानतीय | यथोक्त |
| 489ङ | करेंसी नोटों या बैंक नोटों से सादृश्य रखने वाली दस्तावेजों की रचना या उपयोग । | एक सौ रुपए का जुर्माना । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 490 | मुद्रक का नाम और पता बताने से इनकार पर । | दो सौ रुपए का जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| अध्याय 19—सेवा संविदाओं का आपराधिक भंग | |||||
| मुद्रक का नाम और पता बताने से इंकार पर। | दो सौ रुपए का जुर्माना | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट | |
| अध्याय 20—विवाह संबंधी अपराध | |||||
| 493 | पुरुष द्वारा स्त्री को, जो उससे विधिपूर्वक विवाहित नहीं है, प्रवंचना से विश्वास कारित करके कि वह उससे विधिपूर्वक विवाहित है, उस विश्वास में उससे सहवास करना । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | असंज्ञेय | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 494 | पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह करना । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | जमानतीय | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 176 | |||||
| 495 | वही अपराध पूर्ववर्ती विवाह को उस व्यक्ति से छिपाकर, जिसके साथ पश्चात्वर्ती विवाह किया जाता है । | दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | असंज्ञेय | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 496 | कपटपूर्ण आशय से विवाहित होने के कर्म को यह जानते हुए किसी व्यक्ति द्वारा पूरा किया जाना कि तद्द्वारा वह विधिपूर्वक विवाहित नहीं हुआ है । | सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 497 | जारकर्म । | पांच वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| 498 | विवाहित स्त्री को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना या निरुद्ध रखना । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| [अध्याय 20क—पति या पति के नातेदारों द्वारा क्रूरता के विषय में | |||||
| 498क | किसी विवाहित स्त्री के प्रति क्रूरता करने के लिए दंड । | तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय यदि अपराध किए जाने से संबंधित इत्तिला पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को अपराध से व्यथित व्यक्ति द्वारा या रक्त, विवाह अथवा दत्तक ग्रहण द्वारा उससे संबंधित किसी व्यक्ति द्वारा या यदि कोई ऐसा नातेदार नहीं है तो ऐसे वर्ग या प्रवर्ग के किसी लोक सेवक द्वारा जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए, दी गई है। | अजमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट] |
| अध्याय 21—मानहानि | |||||
| 500 | राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या राज्य के राज्यपाल या संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक या मंत्री के विरुद्ध मानहानि जो उसके लोककृत्यों के निर्वहन में उसके आचरण के बारे में हो जब लोक अभियोजक ने परिवाद संस्थित किया हो। | दो वर्ष के लिए सादा कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | सेशन न्यायालय |
| PDF पृष्ठ 177 | |||||
| किसी अन्य मामले में मानहानि । | दो वर्ष के लिए सादा कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | सेशन न्यायालय | |
| राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या राज्य के राज्यपाल या संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक या मंत्री के विरुद्ध मानहानिकारक जानते हुए ऐसी बात को मुद्रित या उत्कीर्ण करना जो उसके लोककृत्यों के निर्वहन में उसके आचरण के बारे में हो, जब लोक अभियोजक ने परिवाद संस्थित किया हो । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | सेशन न्यायालय | |
| किसी अन्य मामले में मानहानिकारक जानते हुए, किसी बात को मुद्रित या उत्कीर्ण करना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट | |
| मानहानिकारक विषय अन्तर्विष्ट रखने वाले मुद्रित या उत्कीर्ण पदार्थ का, यह जानते हुए विक्रय कि उनमें राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या राज्य के राज्यपाल या संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक या मंत्री के विरुद्ध उसके लोककृत्यों के निर्वहन में उसके आचरण के बारे में ऐसा विषय अंतर्विष्ट है, जब लोक अभियोजक ने परिवाद संस्थित किया हो । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | सेशन न्यायालय | |
| किसी अन्य मामले में मानहानिकारक बात को अंतर्विष्ट रखने वाले मुद्रित या उत्कीर्ण पदार्थ का यह जानते हुए विक्रय कि उसमें ऐसा विषय अंतर्विष्ट है । | दो वर्ष के लिए सादा कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट | |
| अध्याय 22—आपराधिक अभित्रास, अपमान और क्षोभ | |||||
| 504 | लोक-शांति भंग कराने को प्रकोपित करने के आशय से अपमान । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
| 505 | मिथ्या कथन, जनश्रुति, आदि को इस आशय से परिचालित करना कि विद्रोह हो अथवा लोक-शान्ति के विरुद्ध अपराध हो । | तीन वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | अजमानतीय | यथोक्त |
| मिथ्या कथन, जनश्रुति, आदि, इस आशय से कि विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा या वैमनस्य पैदा हो । | यथोक्त | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त | |
| पूजा के स्थान आदि में किया गया मिथ्या कथन, जनश्रुति, आदि इस आशय से कि शत्रुता, घृणा या वैमनस्य पैदा हो । | पांच वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त | |
| 506 | आपराधिक अभित्रास । | दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | यथोक्त |
| PDF पृष्ठ 178 | |||||
| यदि धमकी, मृत्यु या घोर उपहति कारित करने, आदि की हो । | सात वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | जमानतीय | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट | |
| 507 | अनाम संसूचना द्वारा अथवा वह धमकी कहां से आती है उसके छिपाने की पूर्वावधानी करके किया गया आपराधिक अभित्रास । | ऊपर की धारा के अधीन दंड के अतिरिक्त, दो वर्ष के लिए कारावास । | यथोक्त | यथोक्त | यथोक्त |
| 508 | व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उप्रेरित करके कि वह दैवी अप्रसाद का भाजन होगा, कराया गया कार्य । | एक वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों । | यथोक्त | यथोक्त | कोई मजिस्ट्रेट |
| 509 | स्त्री की लज्जा का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहना या कोई अंगविक्षेप करना, आदि। | [तीन वर्ष के लिए सादा कारावास और जुर्माना ।] | संज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| 510 | मत्तता की हालत में लोक स्थान, आदि में प्रवेश करना और किसी व्यक्ति को क्षोभ कारित करना । | चौबीस घंटे के लिए सादा कारावास, या दस रुपए का जुर्माना, या दोनों । | असंज्ञेय | यथोक्त | यथोक्त |
| अध्याय 23—अपराधों को करने के प्रयत्न | |||||
| 511 | आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय अपराधों को करने का प्रयत्न करना और ऐसे प्रयत्न में ऐसे अपराध के किए जाने की दशा में कोई कार्य करना । | आजीवन कारावास या उस दीर्घतम अवधि के आधे से अधिक न होने वाला कारावास जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या जुर्माना, या दोनों । | इसके अनुसार कि वह अपराध संज्ञेय है या असंज्ञेय । | इसके अनुसार कि वह अपराध जिसका अपराधी द्वारा प्रयत्न किया गया है जमानतीय है या नहीं । | वह न्यायालय जिसके द्वारा कि प्रयतित अपराध विचारणीय है । |
| अपराध | संज्ञेय या असंज्ञेय | जमानतीय या अजमानतीय | किसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है |
|---|---|---|---|
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| यदि मृत्यु, आजीवन कारावास या सात वर्ष से अधिक के लिए कारावास से दंडनीय है । | संज्ञेय | अजमानतीय | सेशन न्यायालय |
| यदि तीन वर्ष और उससे अधिक किंतु सात वर्ष से अनधिक के लिए कारावास से दंडनीय है । | यथोक्त | यथोक्त | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट |
| यदि तीन वर्ष से कम के लिए कारावास या केवल जुर्माने से दंडनीय है । | असंज्ञेय | जमानतीय | कोई मजिस्ट्रेट |
संशोधन टिप्पणियां
- 2013 के अधिनियम सं० 13 की धारा 24 द्वारा अंतःस्थापित । (PDF पृष्ठ 143)
- 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 42 द्वारा अंतःस्थापित । (PDF पृष्ठ 144)
- 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 42 द्वारा “यथोक्त” के स्थान पर प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 144)
- 2006 के अधिनियम सं० 2 की धारा 7 द्वारा अंतःस्थापित । (PDF पृष्ठ 147)
- 2006 के अधिनियम सं० 2 की धारा 7 द्वारा “यथोक्त” के स्थान प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 147)
- 1983 के अधिनियम सं० 43 की धारा 5 द्वारा अंतःस्थापित । (PDF पृष्ठ 152)
- 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 42 द्वारा अंतःस्थापित । (PDF पृष्ठ 152)
- 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 42 द्वारा “यथोक्त” के स्थान पर प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 156)
- 1986 के अधिनियम सं० 43 की धारा 11 द्वारा से अंतःस्थापित । (PDF पृष्ठ 159)
- 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 42 द्वारा “यथोक्त” के स्थान पर प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 160)
- 2013 के अधिनियम सं० 13 की धारा 24 द्वारा प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 160)
- 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 42 द्वारा “जमानतीय” के स्थान पर प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 161)
- 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 42 द्वारा “अजमानतीय” के स्थान पर प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 161)
- 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 42 द्वारा “यथोक्त” के स्थान पर प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 162)
- 2013 के अधिनियम सं० 13 की धारा 24 द्वारा प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 163)
- 1993 के अधिनियम सं० 42 की धारा 4 द्वारा अंतःस्थापित । (PDF पृष्ठ 164)
- 2013 के अधिनियम सं० 13 की धारा 24 द्वारा प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 165)
- 2013 के अधिनियम सं० 13 की धारा 24 द्वारा प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 166)
- 2001 के अधिनियम सं० 30 की धारा 2 और दूसरी अनुसूची द्वारा धारा 377 की प्रविष्टियों के स्थान पर प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 167)
- 1983 के अधिनियम सं० 46 की धारा 6 द्वारा अंतःस्थापित । (PDF पृष्ठ 176)
- 2013 के अधिनियम सं० 13 की धारा 24 द्वारा प्रतिस्थापित । (PDF पृष्ठ 178)
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