भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 20/358 / 358
358निरसन और व्यावृत्ति
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 152–153स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्द(1) भारतीय दंड संहिता का इसके द्वारा निरसन किया जाता है ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट संहिता के निरसन के होते हुए भी, निम्नलिखित पर इसका कोई प्रभाव नहीं होगा,—
(क) ऐसी निरसित संहिता के पूर्व संप्रवर्तन या उसके अधीन सम्यक् रूप से की गई या सहन की गई कोई बात; या
(ख) ऐसी निरसित संहिता के अधीन अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत कोई अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या उत्तरदायित्व ; या
(ग) ऐसी निरसित संहिता के विरुद्ध किए गए किन्हीं अपराधों के संबंध में उपगत कोई शास्ति, या दंड ; या
(घ) ऐसी किसी शास्ति या दंड के संबंध में कोई अन्वेषण या उपचार; या
(ङ) पूर्वोक्त ऐसी किसी शास्ति या दंड के संबंध में कोई कार्यवाही, अन्वेषण या उपचार और ऐसी कोई कार्यवाही या उपचार संस्थित हो सकेगा, जारी रह सकेगा या प्रवृत्त हो सकेगा और ऐसी किसी शास्ति का अधिरोपण इस प्रकार किया जा सकेगा, मानो उस संहिता का निरसन नहीं किया गया है।
(3) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्तच संहिता के अधीन की गई कोई बात या कोई कार्रवाई, इस संहिता के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
(4) निरसन के प्रभाव के संबंध में, उपधारा (2) में विशिष्ट विषयों का उल्लेख, साधारण खंड अधिनियम, 1897 की धारा 6 के साधारणतया लागू होने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने या प्रभावित करने वाला नहीं माना जाएगा ।
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