भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 10/145 / 531
145प्रक्रिया
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 214–215स्रोत
(1) किसी व्यक्ति के विरुद्ध धारा 144 के अधीन कार्यवाही किसी ऐसे जिले में की जा सकती है—
(क) जहां वह है ; या
(ख) जहां वह या उसकी पत्नी निवास करती है ; या
(ग) जहां उसने अंतिम बार, यथास्थिति, अपनी पत्नी के साथ या अधर्मज संतान की माता के साथ निवास किया है ; या
(घ) जहां उसका पिता निवास करता है या उसकी माता निवास करती है ।
(2) ऐसी कार्यवाही में सब साक्ष्य, ऐसे व्यक्ति की उपस्थिति में, जिसके विरुद्ध भरणपोषण के लिए संदाय का आदेश देने की प्रस्थापना है, या जब उसकी वैयक्तिक उपस्थिति से अभिमुक्ति दे दी गई है तब उसके अधिवक्ता की उपस्थिति में लिया जाएगा और उस रीति से अभिलिखित किया जाएगा जो समन-मामलों के लिए विहित है :
परंतु यदि मजिस्ट्रेट का यह समाधान हो जाए कि ऐसा व्यक्ति जिसके विरुद्ध भरणपोषण के लिए संदाय का आदेश देने की प्रस्थापना है, तामील से जानबूझकर बच रहा है या न्यायालय में उपस्थित होने में जानबूझकर उपेक्षा कर रहा है तो मजिस्ट्रेट मामले को एकपक्षीय रूप में सुनने और अवधारण करने के लिए अग्रसर हो सकेगा और ऐसे दिया गया कोई आदेश उसकी तारीख से तीन मास के भीतर किए गए आवेदन पर दर्शित अच्छे कारण से ऐसे निबंधनों के अधीन जिनके अंतर्गत विरोधी पक्षकार को खर्चे के संदाय के बारे में ऐसे निबंधन भी हैं जो मजिस्ट्रेट न्यायोचित और उचित समझें, अपास्त किया जा सकेगा ।
(3) धारा 144 के अधीन आवेदनों पर कार्यवाही करने में न्यायालय को शक्ति होगी कि वह खर्चों के बारे में ऐसा आदेश दे जो न्यायसंगत है ।
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