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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 37/510 / 531

510आरोप विरचित न करने या उसके अभाव या उसमें गलती का प्रभाव

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 370स्रोत

(1) किसी सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय का कोई निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश केवल इस आधार पर कि कोई आरोप विरचित नहीं किया गया या इस आधार पर कि आरोप में कोई गलती, लोप या अनियमितता थी, जिसके अन्तर्गत आरोपों का कुसंयोजन भी है, उस दशा में ही अविधिमान्य समझा जाएगा जब अपील, पुष्टीकरण या पुनरीक्षण न्यायालय की राय में उसके कारण वस्तुतः न्याय नहीं हो पाया है ।

(2) यदि अपील, पुष्टीकरण या पुनरीक्षण न्यायालय की यह राय है कि वस्तुतः न्याय नहीं हो पाया है तो वह—

(क) आरोप विरचित न किए जाने वाली दशा में यह आदेश कर सकेगा कि आरोप विरचित किया जाए और आरोप की विरचना के ठीक पश्चात् से विचारण पुनः प्रारंभ किया जाए ;

(ख) आरोप में किसी गलती, लोप या अनियमितता वाली दशा में यह निदेश दे सकेगा कि किसी ऐसी रीति से, जिसे वह ठीक समझे, विरचित आरोप पर नया विचारण किया जाए :

परन्तु यदि न्यायालय की यह राय है कि मामले के तथ्य ऐसे हैं कि साबित तथ्यों के संबंध में अभियुक्त के विरुद्ध कोई विधिमान्य आरोप नहीं लगाया जा सकता, तो वह दोषसिद्धि को अभिखंडित कर देगा ।

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