दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/अध्याय 14/222 / 534
196राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र के लिए अभियोजना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 59–60स्रोत
(1) कोई न्यायालय,—
(क) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अध्याय 6 के अधीन या धारा 153क, [धारा 295क या धारा 505 की उपधारा (1)] के अधीन दंडनीय किसी अपराध का ; अथवा
(ख) ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र का ; अथवा
(ग) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 108क में यथावर्णित किसी दुप्रेरण का,
संज्ञान केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं ।
[(1क) कोई न्यायालय,—
(क) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 153ख या धारा 505 की उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन दंडनीय किसी अपराध का, अथवा
(ख) ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र का,
संज्ञान केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं ।]
(2) कोई न्यायालय भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 120ख के अधीन दंडनीय किसी आपराधिक षड्यंत्र के किसी ऐसे अपराध का, जो मृत्यु, आजीवन कारावास या दो वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कठिन कारावास से दंडनीय [अपराध] करने के आपराधिक षड्यंत्र से भिन्न है, संज्ञान तब तक नहीं करेगा जब तक राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट ने कार्यवाही शुरू करने के लिए लिखित सम्मति नहीं दे दी है :
परंतु जहां आपराधिक षड्यंत्र ऐसा है जिसे धारा 195 के उपबंध लागू हैं वहां ऐसी कोई सम्मति आवश्यक न होगी ।
(3) केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार, “[उपधारा (1) या उपधारा (1क) के अधीन मंजूरी देने के पूर्व और जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (1क) के अधीन मंजूरी देने से पूर्व,.] और राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (2) के अधीन सम्मति देने के पूर्व, ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा जो निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का नहीं है, प्रारंभिक अन्वेषण किए जाने का आदेश दे सकता है और उस दशा में ऐसे पुलिस अधिकारी की वे शक्तियां होंगी जो धारा 155 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट हैं ।
संशोधन टिप्पणियां
- 1980 के अधिनियम सं० 63 की धारा 3 द्वारा “धारा 153ख धारा, 295क या धारा 505” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1980 के अधिनियम सं० 63 की धारा 3 द्वारा अंतःस्थापित ।
- 1978 के अधिनियम सं० 45 की धारा 16 द्वारा “संज्ञेय अपराध” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1980 के अधिनियम सं० 63 की धारा 3 द्वारा “उपधारा (1) के अधीन मंजूरी देने के पूर्व” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
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