भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 15/217 / 531
217राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र के लिए अभियोजन
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 250–251स्रोत
(1) कोई न्यायालय,—
(क) भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अध्याय 7 के अधीन या धारा 196, धारा 299 या धारा 353 की उपधारा (4) के अधीन दंडनीय किसी अपराध का ; या
(ख) ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र का ; या
(ग) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 47 में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का,
संज्ञान, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं ।
(2) कोई न्यायालय,—
(क) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 497 या धारा 353 की उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन दंडनीय किसी अपराध का, या
(ख) ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र का,
संज्ञान केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं ।
(3) कोई न्यायालय भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61 की उपधारा (2) के अधीन दंडनीय किसी आपराधिक षड्यंत्र के किसी ऐसे अपराध का, जो मृत्यु, आजीवन कारावास या दो वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कठोर कारावास से दंडनीय अपराध करने के आपराधिक षड्यंत्र से भिन्न है, संज्ञान तब तक नहीं करेगा, जब तक राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट ने कार्यवाही शुरू करने के लिए लिखित सम्मति नहीं दे दी है:
परंतु जहां आपराधिक षड्यंत्र ऐसा है, जिसे धारा 245 के उपबंध लागू हैं, वहां ऐसी कोई सम्मति आवश्यक नहीं होगी ।
(4) केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार, उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन मंजूरी देने के पूर्व और जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (2) के अधीन मंजूरी देने से पूर्व, और राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (3) के अधीन सम्मति देने के पूर्व, ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा जो निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का नहीं है, प्रारंभिक अन्वेषण किए जाने का आदेश दे सकता है और उस दशा में ऐसे पुलिस अधिकारी की वे शक्तियां होंगी, जो धारा 174 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट हैं ।
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