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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 15/210 / 531

210मजिस्ट्रेटों द्वारा अपराधों का संज्ञान

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 248स्रोत

(1) इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट और उपधारा (2) के अधीन विशेषतया सशक्त किया गया कोई द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट, किसी भी अपराध का संज्ञान निम्नलिखित दशाओं में कर सकता है :—

(क) उन तथ्यों का परिवाद प्राप्त होने पर, जिनमें किसी विशेष विधि के अधीन प्राधिकृत किए गए किसी व्यक्ति द्वारा फाइल किया गया कोई परिवाद भी है, जो ऐसे अपराध को गठित करता है ;

(ख) ऐसे तथ्यों के बारे में (इलैक्ट्रानिक ढंग सहित किसी ढंग में प्रस्तुत) पुलिस रिपोर्ट पर ;

(ग) पुलिस अधिकारी से भिन्न किसी व्यक्ति से प्राप्त इस सूचना पर या स्वयं अपनी इस जानकारी पर, कि ऐसा अपराध किया गया है ।

(2) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट को ऐसे अपराधों का, जिनकी जांच या विचारण करना उसकी क्षमता के भीतर है, उपधारा (1) के अधीन संज्ञान करने के लिए सशक्त कर सकता है ।

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