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दंड प्रक्रिया संहिता, 1973

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/अध्याय 25/375 / 534

333जब यह प्रतीत हो कि अभियुक्त स्वस्थचित्त रहा है

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 100स्रोत

जब अभियुक्त जांच या विचारण के समय स्वस्थचित्त प्रतीत होता है और मजिस्ट्रेट का अपने समक्ष दिए गए साक्ष्य से समाधान हो जाता है कि यह विश्वास करने का कारण है कि अभियुक्त ने ऐसा कार्य किया है, जो यदि वह स्वस्थचित्त होता तो अपराध होता और यह कि वह उस समय जब वह कार्य किया गया था चित्त-विकृति के कारण उस कार्य का स्वरूप या यह जानने में असमर्थ था, कि यह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है, तब मजिस्ट्रेट मामले में आगे कार्यवाही करेगा और यदि अभियुक्त का विचारण सेशन न्यायालय द्वारा किया जाना चाहिए तो उसे सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण के लिए सुपुर्द करेगा ।

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