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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 7/158 / 358

158ऐसे कैदी के निकल भागने में मदद करना, उसे छुड़ाना या संश्रय देना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 76स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जो कोई, यह जानते हुए किसी राजकैदी या युद्धकैदी को विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागने में मदद करता है या सहायता देता है, या किसी ऐसे कैदी को छुड़ाता है, या छुड़ाने का प्रयत्न करता है, या किसी ऐसे कैदी को, जो विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है, संश्रय देता है या छिपाता है या ऐसे कैदी के फिर से पकड़े जाने का प्रतिरोध करता है या करने का प्रयत्न करता है, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।

स्पष्टीकरण—कोई राजकैदी या युद्धकैदी, जिसे अपने पैरोल पर भारत में कतिपय सीमाओं के भीतर, समग्र रूप से विचरण की अनुमति है, विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है, यह तब कहा जाता है, जब वह उन सीमाओं से, जिनके भीतर उसे समग्र रूप से विचरण की अनुमति है, परे चला जाता है।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।