भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 14/207 / 531
207स्थानीय अधिकारिता के परे किए गए अपराध के लिए समन या वारंट जारी करने की शक्ति
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 247स्रोत
(1) जब किसी प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को यह विश्वास करने का कारण दिखाई देता है कि उसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर के किसी व्यक्ति ने ऐसी अधिकारिता के बाहर, (चाहे भारत के भीतर या बाहर) ऐसा अपराध किया है, जिसकी जांच या विचारण धारा 197 से धारा 205 तक की धाराओं (जिनके अंतर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं), के उपबंधों के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ऐसी अधिकारिता के भीतर नहीं किया जा सकता है किंतु जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन भारत में विचारणीय है तब ऐसा मजिस्ट्रेट उस अपराध की जांच ऐसे कर सकता है, मानो वह ऐसी स्थानीय अधिकारिता के भीतर किया गया है और ऐसे व्यक्ति को अपने समक्ष उपस्थित होने के लिए इसमें इसके पूर्व उपबंधित प्रकार से विवश कर सकता है और ऐसे व्यक्ति को ऐसे अपराध की जांच या विचारण करने की अधिकारिता वाले मजिस्ट्रेट के पास भेज सकता है या यदि ऐसा अपराध मृत्यु से या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं है और ऐसा व्यक्ति इस धारा के अधीन कार्रवाई करने वाले मजिस्ट्रेट को समाधानप्रद रूप में जमानत देने के लिए तैयार और इच्छुक है तो ऐसी अधिकारिता वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी उपस्थिति के लिए बंधपत्र या जमानतपत्र ले सकेगा ।
(2) जब ऐसी अधिकारिता वाले मजिस्ट्रेट एक से अधिक हैं और इस धारा के अधीन कार्य करने वाला मजिस्ट्रेट अपना समाधान नहीं कर पाता है कि किस मजिस्ट्रेट के पास या समक्ष ऐसा व्यक्ति भेजा जाए या उपस्थित होने के लिए आबद्ध किया जाए, तो मामले की रिपोर्ट उच्च न्यायालय के आदेश के लिए की जाएगी ।
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