नई–पुरानी धाराmanzill.com
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 22/283 / 531

283संक्षिप्त विचारण करने की शक्ति

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 279–280स्रोत

(1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी,—

(क) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ;

(ख) कोई प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट,

सभी निम्नलिखित अपराधों का या उनमें से किसी का संक्षेपतः विचारण करेगा,—

(i) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303 की उपधारा (2), धारा 305 या धारा 306 के अधीन चोरी, जहां चुराई हुई संपत्ति का मूल्य बीस हजार रुपए से अधिक नहीं है :

(ii) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 317 की उपधारा (2) के अधीन चोरी की संपत्ति को प्राप्त करना या रखे रखना, जहां ऐसी संपत्ति का मूल्य बीस हजार रुपए से अधिक नहीं है;

(iii) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 317 की उपधारा (5) के अधीन चुराई हुई संपत्ति को छिपाने या उसका व्ययन करने में सहायता करना, जहां ऐसी संपत्ति का मूल्य बीस हजार रुपए से अधिक नहीं है ;

(iv) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 331 की उपधारा (2) और उपधारा (3) के अधीन अपराध ;

(v) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 352 के अधीन लोकशांति भंग कराने को प्रकोपित करने के आशय से अपमान और धारा 351 की उपधारा (2) और उपधारा (3) के अधीन आपराधिक अभित्रास ;

(vi) पूर्ववर्ती अपराधों में से किसी का दुष्प्रेरण ;

(vii) पूर्ववर्ती अपराधों में से किसी को करने का प्रयत्न, जब ऐसा प्रयत्न, अपराध है;

(viii) ऐसे कार्य से होने वाला कोई अपराध, जिसकी बाबत पशु अतिचार अधिनियम, 487 की धारा 20 के अधीन परिवाद किया जा सकता है ।

(2) मजिस्ट्रेट अभियुक्त को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान किए जाने के पश्चात्, ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएं, ऐसे सभी या किन्हीं अपराधों, जो मृत्यु, आजीवन कारावास या तीन वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय नहीं हैं, का संक्षिप्त विचारण कर सकेगा :

परन्तु इस उपधारा के अधीन किसी मामले का संक्षिप्त विचारण करने के लिए किसी मजिस्ट्रेट के विनिश्चय के विरुद्ध कोई अपील नहीं होगी ।

(3) जब संक्षिप्त विचारण के दौरान मजिस्ट्रेट को प्रतीत होता है कि मामला इस प्रकार का है कि उसका विचारण संक्षेपतः किया जाना अवांछनीय है तो वह मजिस्ट्रेट किन्हीं साक्षियों को, जिनकी परीक्षा की जा चुकी है, पुनः बुलाएगा और मामले को इस संहिता द्वारा उपबंधित रीति से पुनः सुनने के लिए अग्रसर होगा ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।