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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 39/521 / 531

521सेना न्यायालय द्वारा विचारणीय व्यक्तियों का कमान अधिकारियों को सौंपा जाना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 372–373स्रोत

(1) केन्द्रीय सरकार, इस संहिता से और वायुसेना अधिनियम, 1950, सेना अधिनियम, 1950 और नौसेना अधिनियम, 1957 और संघ के सशस्त्र बलों से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि से संगत नियम ऐसे मामलों के लिए बना सकेगी जिनमें सेना, नौसेना या वायुसेना संबंधी विधि या अन्य ऐसी विधि के अधीन होने वाले व्यक्तियों का विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा, जिसको यह संहिता लागू होती है, या सेना न्यायालय द्वारा किया जाएगा ; तथा जब कोई व्यक्ति किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष लाया जाता है और ऐसे अपराध के लिए आरोपित किया जाता है, जिसके लिए उसका विचारण या तो उस न्यायालय द्वारा जिसको यह संहिता लागू होती है, या सेना न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, तब ऐसा मजिस्ट्रेट ऐसे नियमों को ध्यान में रखेगा और उचित मामलों में उसे उस अपराध के कथन सहित, जिसका उस पर अभियोग है, उस यूनिट के जिसका वह हो, कमान आफिसर को या, यथास्थिति, निकटतम सेना, नौसेना या वायुसेना स्टेशन के कमान आफिसर को सेना न्यायालय द्वारा उसका विचारण किए जाने के प्रयोजन से सौंप देगा ।

स्पष्टीकरण—इस धारा मैं,—

(क) “यूनिट” के अन्तर्गत रेजिमेंट, कोर, पोत, टुकड़ी, ग्रुप, बटालियन या कम्पनी भी है:

(ख) “सेना न्यायालय” के अन्तर्गत ऐसा कोई अधिकरण भी है जिसकी वैसी ही शक्तियां हैं जैसी संघ के सशस्त्र बलों को लागू सुसंगत विधि के अधीन गठित किसी सेना न्यायालय की होती हैं ।

(2) प्रत्येक मजिस्ट्रेट ऐसे अपराध के लिए अभियुक्त व्यक्ति को पकड़ने और सुरक्षित रखने के लिए अपनी ओर से अधिकतम प्रयास करेगा, जब उसे किसी ऐसे स्थान में तैनात या नियोजित सैनिकों, नाविकों या वायुसैनिकों के किसी यूनिट या निकाय के कमान आफिसर से उस प्रयोजन के लिए लिखित आवेदन प्राप्त होता है ।

(3) उच्च न्यायालय, यदि ठीक समझे तो, यह निदेश दे सकेगा कि राज्य के भीतर स्थित किसी जेल में निरुद्ध किसी बंदी को सेना न्यायालय के समक्ष लंबित किसी मामले के बारे में विचारण के लिए या परीक्षा किए जाने के लिए सेना न्यायालय के समक्ष लाया जाए ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।