दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/अध्याय 17/246 / 534
218सुभिन्न अपराधों के लिए पृथक् आरोप
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(1) प्रत्येक सुभिन्न अपराध के लिए, जिसका किसी व्यक्ति पर अभियोग है, पृथक् आरोप होगा और ऐसे प्रत्येक आरोप का विवरण पृथक्ततः किया जाएगा :
परंतु जहां अभियुक्त व्यक्ति, लिखित आवेदन द्वारा, ऐसा चाहता है और मजिस्ट्रेट की राय है कि उससे ऐसे व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा वहां मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति के विरुद्ध विरचित सभी या किन्हीं आरोपों का विचारण एक साथ कर सकता है ।
2. उपधारा (1) की कोई बात धारा 219, 220, 221 और 223 के उपबंधों के प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी ।
दृष्टांत क पर एक अवसर पर चोरी करने और दूसरे किसी अवसर पर घोर उपहति कारित करने का अभियोग है । चोरी के लिए और घोर
उपहति कारित करने के लिए क पर पृथक्-पृथक् आरोप लगाने होंगे और उनका विचारण पृथक्ततः करना होगा ।
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