दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/अध्याय 17/247 / 534
219एक ही वर्ष में किए गए एक ही किस्म के तीन अपराधों का आरोप एक साथ लगाया जा सकेगा
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 68स्रोत
(1) जब किसी व्यक्ति पर एक ही किस्म के ऐसे एक से अधिक अपराधों का अभियोग है जो उन अपराधों में से पहले अपराध से लेकर अंतिम अपराध तक बारह मास के अंदर ही किए गए हैं, चाहे वे एक ही व्यक्ति के बारे में किए गए हों या नहीं, तब उस पर उनमें से तीन से अनधिक कितने ही अपराधों के लिए एक ही विचारण में आरोप लगाया और विचारण किया जा सकता है।
(2) अपराध एक ही किस्म के तब होते हैं जब वे भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) या किसी विशेष या स्थानीय विधि की एक ही धारा के अधीन दंड की समान मात्रा से दंडनीय होते हैं :
परंतु इस धारा के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 379 के अधीन दंडनीय अपराध उसी किस्म का अपराध है जिस किस्म का उक्त संहिता की धारा 380 के अधीन दंडनीय अपराध है, और भारतीय दंड संहिता या किसी विशेष या स्थानीय विधि की किसी धारा के अधीन दंडनीय अपराध उसी किस्म का अपराध है जिस किस्म का ऐसे अपराध करने का प्रयत्न है, जब ऐसा प्रयत्न अपराध हो ।
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