दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/अध्याय 7/105 / 534
95कुछ प्रकाशनों के समपहृत होने की घोषणा करने और उनके लिए तलाशी-वारंट जारी करने की शक्ति
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 25–26स्रोत
(1) जहां राज्य सरकार को प्रतीत होता है कि—
(क) किसी समाचार-पत्र या पुस्तक में ; अथवा
(ख) किसी दस्तावेज में,
चाहे वह कहीं भी मुद्रित हुई हो, कोई ऐसी बात अंतर्विष्ट है जिसका प्रकाशन भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 124क या धारा 153क या धारा 153ख या धारा 292 या धारा 293 या धारा 295क के अधीन दंडनीय है, वहां राज्य सरकार ऐसी बात अंतर्विष्ट करने वाले समाचार-पत्र के अंक की प्रत्येक प्रति का और ऐसी पुस्तक या अन्य दस्तावेज की प्रत्येक प्रति का सरकार के पक्ष में समपहरण कर लिए जाने की घोषणा, अपनी राय के आधारों का कथन करते हुए, अधिसूचना द्वारा कर सकती है और तब भारत में, जहां भी वह मिले, कोई भी पुलिस अधिकारी उसे अभिगृहीत कर सकता है और कोई मजिस्ट्रेट, उप-निरीक्षक से अनिम्न पंक्ति के किसी पुलिस अधिकारी को, किसी ऐसे परिसर में, जहां ऐसे किसी अंक की कोई प्रति या ऐसी कोई पुस्तक या अन्य दस्तावेज है या उसके होने का उचित संदेह है, प्रवेश करने और उसके लिए तलाशी लेने के लिए वारंट द्वारा प्राधिकृत कर सकता है।
(2) इस धारा में और धारा 96 में—
(क) “समाचार-पत्र” और “पुस्तक” के वे ही अर्थ होंगे जो प्रेस और पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1867 (1867 का 25) में हैं,
(ख) “दस्तावेज” के अंतर्गत रंगचित्र रेखाचित्र या फोटोचित्र या अन्य दृश्यरूपण भी हैं ।
(3) इस धारा के अधीन पारित किसी आदेश या की गई किसी कार्रवाई को किसी न्यायालय में धारा 96 के उपबंधों के अनुसार ही प्रश्नगत किया जाएगा अन्यथा नहीं ।
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