भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 15/326 / 570
295कविमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किए गए हों
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 55स्रोत
यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जो कोई [भारत के नागरिकों के] किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के विमर्शित और विद्वेषपूर्ण आशय से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान [उच्चारित या लिखित शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा] करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि [तीन वर्ष] तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।]
संशोधन टिप्पणियां
- 1927 के अधिनियम सं० 25 की धारा 2 द्वारा अंतःस्थापित ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “हिज मजेस्टी की प्रजा” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1961 के अधिनियम सं० 41 की धारा 3 द्वारा कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1961 के अधिनियम सं० 41 की धारा 3 द्वारा “दो वर्ष” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
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