भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 3/25 / 531
25एक ही विचारण में कई अपराधों के लिए दोषसिद्ध होने के मामलों में दंडादेश
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 168स्रोत
(1) जब कोई व्यक्ति एक ही विचारण में दो या अधिक अपराधों के लिए दोषसिद्ध किया जाता है तब न्यायालय, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 9 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उसे ऐसे अपराधों के लिए विहित विभिन्न दंडों में से उन दंडों के लिए, जिन्हें देने के लिए ऐसा न्यायालय सक्षम है, दंडादेश दे सकेगा ; और न्यायालय, अपराधों की गंभीरता पर विचार करते हुए, ऐसे दंडादेश साथ-साथ या क्रमवर्ती रूप से भोगने का आदेश देगा ।
(2) दंडादेशों के क्रमवर्ती होने की दशा में, केवल इस कारण से कि कई अपराधों के लिए संकलित दंड उस दंड से अधिक है जो वह न्यायालय एक अपराध के लिए दोषसिद्धि पर देने के लिए सक्षम है, न्यायालय के लिए यह आवश्यक नहीं होगा कि अपराधी को उच्चतर न्यायालय के समक्ष विचारण के लिए भेजे :
परंतु—
(क) किसी भी दशा में, ऐसा व्यक्ति बीस वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास के लिए दंडादिष्ट नहीं किया जाएगा ;
(ख) संकलित दंड, उस दंड की मात्रा के दुगने से अधिक नहीं होगा जिसे एक अपराध में देने के लिए वह न्यायालय सक्षम है ।
(3) किसी सिद्धदोष व्यक्ति द्वारा अपील के प्रयोजन के लिए, उन क्रमवर्ती दंडादेशों का योग, जो इस धारा के अधीन उसके विरुद्ध दिए गए हैं, एक दंडादेश समझा जाएगा ।
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