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दंड प्रक्रिया संहिता, 1973

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/अध्याय 29/423 / 534

378दोषमुक्ति की दशा में अपील

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 112स्रोत

(1) “[(1) उपधारा (2) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय और उपधारा (3) और उपधारा (5) के उपबंधों के अधीन रहते हुए,—

(क) जिला मजिस्ट्रेट, किसी मामले में, लोक अभियोजक को किसी संज्ञेय और अजमानतीय अपराध की बाबत किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित दोषमुक्ति के आदेश से सेशन न्यायालय में अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगा ;

(ख) राज्य सरकार, किसी मामले में लोक अभियोजक को उच्च न्यायालय से भिन्न किसी न्यायालय द्वारा पारित दोषमुक्ति के मूल या अपीली आदेश से [जो खंड (क) के अधीन आदेश नहीं है] या पुनरीक्षण में सेशन न्यायालय द्वारा पारित दोषमुक्ति के आदेश से उच्च न्यायालय में,

अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगी ।]

(2) यदि ऐसा दोषमुक्ति का आदेश किसी ऐसे मामले में पारित किया जाता है जिसमें अपराध का अन्वेषण दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन अधिनियम, 1946 (1946 का 25) के अधीन गठित दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन द्वारा या इस संहिता से भिन्न किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन अपराध का अन्वेषण करने के लिए सशक्त किसी अन्य अभिकरण द्वारा किया गया है तो [केन्द्रीय सरकार उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, लोक अभियोजक को—

(क) दोषमुक्ति के ऐसे आदेश से, जो संज्ञेय और अजमानतीय अपराध की बाबत किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किया गया है सेशन न्यायालय में ;

(ख) दोषमुक्ति के ऐसे मूल या अपीली आदेश से, जो किसी उच्च न्यायालय से भिन्न किसी न्यायालय द्वारा पारित किया गया है [जो खंड (क) के अधीन आदेश नहीं है] या दोषमुक्ति के ऐसे आदेश से, जो पुनरीक्षण में सेशन न्यायालय द्वारा पारित किया गया है, उच्च न्यायालय में, अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकती है ।]

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन “[उच्च न्यायालय को कोई अपील] उच्च न्यायालय की इजाजत के बिना ग्रहण नहीं की जाएगी ।

(4) यदि दोषमुक्ति का ऐसा आदेश परिवाद पर संस्थित किसी मामले में पारित किया गया है और उच्च न्यायालय, परिवादी द्वारा उससे इस निमित्त आवेदन किए जाने पर, दोषमुक्ति के आदेश की अपील करने की विशेष इजाजत देता है तो परिवादी ऐसी अपील उच्च न्यायालय में उपस्थित कर सकता है।

(5) दोषमुक्ति के आदेश से अपील करने की विशेष इजाजत दिए जाने के लिए उपधारा (4) के अधीन कोई आवेदन उच्च न्यायालय द्वारा, उस दशा में जिसमें परिवादी लोक सेवक है उस दोषमुक्ति के आदेश की तारीख से संगणित, छह मास की समाप्ति के पश्चात् और प्रत्येक अन्य दशा में ऐसे संगणित साठ दिन की समाप्ति के पश्चात् ग्रहण नहीं किया जाएगा ।

(6) यदि किसी मामले में दोषमुक्ति के आदेश से अपील करने की विशेष इजाजत दिए जाने के लिए उपधारा (4) के अधीन कोई आवेदन नामंजूर किया जाता है तो उस दोषमुक्ति के आदेश से उपधारा (1) के अधीन या उपधारा (2) के अधीन कोई अपील नहीं होगी ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 32 द्वारा उपधारा (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  2. 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 32 द्वारा कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  3. 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 32 द्वारा “कोई अपील” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

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