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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 3/61 / 185

57वे तथ्य, जिनकी न्यायिक अवेक्षा न्यायालय को करनी होगी

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 20–21

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

बीएसए से मिलान जल्द

1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।

न्यायालय निम्नलिखित तथ्यों की न्यायिक अवेक्षा करेगा—

[(1) भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त समस्त विधियां;]

(2) [यूनाइटेड किंगडम की] पार्लमेन्ट द्वारा पारित या एतत्पश्चात् पारित किए जाने वाले समस्त पब्लिक ऐक्ट तथा वे समस्त स्थानीय और पर्सनल ऐक्ट जिनके बारे में [यूनाइटेड किंगडम की] पार्लमेन्ट ने निर्दिष्ट किया है कि उनकी न्यायिक अवेक्षा की जाए;

(3) [भारतीय] सेना, [नौसेना या वायुसेना] के लिए युद्ध की नियमावली;

[(4) यूनाइटेड किंगडम की पार्लमेंट की, भारत की संविधान सभा की, संसद् की तथा किसी प्रान्त या राज्यों में तत्समय प्रवृत्त विधियों के अधीन स्थापित विधान-मण्डलों की कार्यवाही का अनुक्रम;]

(5) ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड की यूनाइटेड किंगडम के तत्समय प्रभु का राज्यारोहण और राजहस्ताक्षर;

(6) वे सब मुद्राएं, जिनकी अंग्रेजी न्यायालय न्यायिक अवेक्षा करते हैं, [[भारत] में के सब न्यायालयों] की और [केन्द्रीय सरकार या क्राउन रिप्रेजेन्टेटिव] के प्राधिकार द्वारा [भारत] के बाहर स्थापित सब न्यायालयों की मुद्राएं, नावधिकरण और समुद्रीय अधिकारिता वाले न्यायालयों की और नोटरीज पब्लिक की मुद्राएं और वे सब मुद्राएं, जिनका कोई व्यक्ति [संविधान या यूनाइटेड किंगडम की पार्लमेन्ट के किसी ऐक्ट या] [भारत] में विधि का बल रखने वाले अधिनियम या विनियम द्वारा उपयोग करने के लिए प्राधिकृत है;

(7) किसी राज्य में किसी लोक पद पर तत्समय आरूढ़ व्यक्तियों के कोई पदारोहण, नाम, उपाधियां, कृत्य और हस्ताक्षर, यदि ऐसे पद पर उनकी नियुक्ति का तथ्य [किसी शासकीय राजपत्र में] अधिसूचित किया गया हो;

(8) [भारत सरकार] द्वारा मान्यताप्राप्त हर राज्य या प्रभु का अस्तित्व, उपाधि और राष्ट्रीय ध्वज;

(9) समय के प्रभाग, पृथ्वी के भौगोलिक प्रभाग तथा शासकीय राजपत्र में अधिसूचित लोक उत्सव, उपवास और अवकाश-दिन;

(10) भारत सरकार के अधिपत्य के अधीन राज्यक्षेत्र;

(11) [भारत सरकार] और अन्य किसी राज्य या व्यक्ति के निकाय के बीच संघर्ष का प्रारम्भ, चालू रहना और पर्यवसान;

(12) न्यायालय के सदस्यों और आफिसरों के तथा उनके उपपदियों और अधीनस्थ आफिसरों और सहायकों के और उसकी आदेशिकाओं के निष्पादन में कार्य करने वाले सब आफिसरों के भी, तथा सब अधिवक्ताओं, अटर्नियों, प्रोक्टरों, वकीलों, प्लीडरों, और उनके समक्ष उपसंजात होने या कार्य करने के लिए किसी विधि द्वारा प्राधिकृत अन्य व्यक्तियों के नाम;

(13) [भूमि या समुद्र पर] मार्ग का नियम ।

इन सभी मामलों में, तथा लोक इतिहास, साहित्य, विज्ञान या कला के सब विषयों में भी न्यायालय समुपयुक्त निर्देश पुस्तकों या दस्तावेजों की सहायता ले सकेगा ।

यदि न्यायालय से किसी तथ्य की न्यायिक अवेक्षा करने की किसी व्यक्ति द्वारा प्रार्थना की जाती है, तो यदि और जब तक वह व्यक्ति कोई ऐसी पुस्तक या दस्तावेज पेश न कर दे, जिसे ऐसा न्यायालय अपने को ऐसा करने को समर्थ बनाने के लिए आवश्यक समझता है, न्यायालय ऐसा करने से इन्कार कर सकेगा ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा पूर्ववर्ती पैरा के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  2. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा अन्तःस्थापित ।
  3. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “हर मजेस्टी की” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  4. 1927 के अधिनियम सं० 10 की धारा 2 और प्रथम अनुसूची द्वारा “या नौसेना” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  5. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा पूर्ववर्ती (4) के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  6. भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 द्वारा “ब्रिटिश भारत के सब न्यायालयों” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  7. 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा “राज्यों” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  8. भारत शासन (भारतीय विधि अनुकलन) आदेश, 1937 द्वारा “सपरिषद् गवर्नर जनरल या सपरिषद् स्थानीय सरकार” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  9. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “संसद् के किसी अधिनियम या” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  10. भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा “भारत के राजपत्र या किसी स्थानीय सरकार के शासकीय राजपत्र में” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  11. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “ब्रिटिश क्राउन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  12. 1872 के अधिनियम सं० 18 की धारा 5 द्वारा अन्तःस्थापित ।

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