हिंदी में, धारा-दर-धारा
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की हर धारा का आधिकारिक हिंदी पाठ। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 से इसकी धाराओं का मिलान जल्द।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
धाराएं185
अध्याय11
पाठ उपलब्ध185
सत्यापित0
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 से धाराओं का मिलान अभी बाकी है। हर पाठ आधिकारिक PDF से लिया गया है; "सत्यापित" धाराएं उससे मिलाकर जांची जा चुकी हैं।यह पाठ कैसे बना
धारा 1 से पढ़ेंअध्याय 1 — प्रारम्भिक4
अध्याय 2 — तथ्यों की सुसंगति के विषय में55
धारा 5विवाद्यक तथ्यों और सुसंगत तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगाधारा 6एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्यों की सुसंगतिधारा 7वे तथ्य जो विवाद्यक तथ्यों के प्रसंग, हेतुक या परिणाम हैंधारा 8हेतु, तैयारी और पूर्व का या पश्चात् का आचरणधारा 9सुसंगत तथ्यों के स्पष्टीकरण या पुरःस्थापन के लिए आवश्यक तथ्यधारा 10सामान्य परिकल्पना के बारे में षड्यंत्रकारी द्वारा कही या की गई बातेंधारा 11वे तथ्य जो अन्यथा सुसंगत नहीं हैं कब सुसंगत हैंधारा 12नुकसानी के लिए वादों में रकम अवधारित करने के लिए न्यायालय को समर्थ करने की प्रवृत्ति रखने वाले तथ्य सुसंगत हैंधारा 13जब कि अधिकार या रूढ़ि प्रश्नगत है, तब सुसंगत तथ्यधारा 14मन या शरीर की दशा या शारीरिक संवदेना का अस्तित्व दर्शित करने वाले तथ्यधारा 15कार्य आकस्मिक या साशय था इस प्रश्न पर प्रकाश डालने वाले तथ्यधारा 16कारबार के अनुक्रम का अस्तित्व कब सुसंगत हैधारा 17स्वीकृति की परिभाषाधारा 18स्वीकृति—कार्यवाही के पक्षकार या उसके अभिकर्ता द्वाराधारा 19उन व्यक्तियों द्वारा स्वीकृतियां जिनकी स्थिति वाद के पक्षकारों के विरुद्ध साबित की जानी चाहिएधारा 20वाद के पक्षकार द्वारा अभिव्यक्त रूप से निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा स्वीकृतियांधारा 21स्वीकृतियों का उन्हें करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध और उनके द्वारा या उनकी ओर से साबित किया जानाधारा 22दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियां कब सुसंगत होती हैंधारा 22कइलैक्ट्रानिक अभिलेखों की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियां कब सुसंगत होती हैंधारा 23सिविल मामलों में स्वीकृतियां कब सुसंगत होती हैंधारा 24उत्प्रेरणा, धमकी या वचन द्वारा कराई गई संस्वीकृति दाण्डिक कार्यवाही में कब विसंगत होती हैधारा 25पुलिस आफिसर से की गई संस्वीकृति का साबित न किया जानाधारा 26पुलिस की अभिरक्षा में होते हुए अभियुक्त द्वारा की गई संस्वीकृति का उसके विरुद्ध साबित न किया जानाधारा 27अभियुक्त से प्राप्त जानकारी में से कितनी साबित की जा सकेगीधारा 28उत्प्रेरणा, धमकी या वचन से पैदा हुए मन पर प्रभाव के दूर हो जाने के पश्चात् की गई संस्वीकृति सुसंगत हैधारा 29अन्यथा सुसंगत संस्वीकृति का गुप्त रखने के वचन आदि के कारण विसंगत न हो जानाधारा 30साबित संस्वीकृति को, जो उसे करने वाले व्यक्ति तथा एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित अन्य को प्रभावित करती है विचार में लेनाधारा 31स्वीकृतियां निश्चायक सबूत नहीं हैं किंतु विबंध कर सकती हैंधारा 32वे दशाएं जिनमें उस व्यक्ति द्वारा सुसंगत तथ्य का किया गया कथन सुसंगत है, जो मर गया है या मिल नहीं सकता, इत्यादिधारा 33किसी साक्ष्य में कथित तथ्यों की सत्यता को पश्चात्वर्ती कार्यवाही में साबित करने के लिए उस साक्ष्य की सुसंगतिधारा 34लेखा पुस्तकों की प्रविष्टियां कब सुसंगत हैंधारा 35कर्तव्य पालन में की गई लोक अभिलेख [इलैक्ट्रानिक अभिलेख] की प्रविष्टियों की सुसंगतिधारा 36मानचित्रों, चार्टों और रेखांकों के कथनों की सुसंगतिधारा 37किन्हीं अधिनियमों या अधिसूचनाओं में अन्तर्विष्ट लोक प्रकृति के तथ्य के बारे में कथन की सुसंगतिधारा 38विधि की पुस्तकों में अन्तर्विष्ट किसी विधि के कथनों की सुसंगतिधारा 39जबकि, कथन किसी बातचीत, दस्तावेज, इलैक्ट्रानिक अभिलेख, पुस्तक अथवा पत्रों या कागज-पत्रों की आवली का भाग हो तब क्या साक्ष्य दिया जाएधारा 40द्वितीय वाद या विचारण के वारणार्थ पूर्व निर्णय सुसंगत हैंधारा 41प्रोबेट इत्यादि विषयक अधिकारिता के किन्हीं निर्णयों की सुसंगतिधारा 42धारा 41 में वर्णित से भिन्न निर्णयों, आदेशों या डिक्रियों की सुसंगति और प्रभावधारा 43धाराओं 40, 41 और 42 में वर्णित से भिन्न निर्णय आदि कब सुसंगत हैंधारा 44निर्णय अभिप्राप्त करने में कपट या दुस्संधि अथवा न्यायालय की अक्षमता साबित की जा सकेगीधारा 45विशेषज्ञों की रायेधारा 45कइलैक्ट्रानिक साक्ष्य के परीक्षक की रायधारा 46विशेषज्ञों की रायों से संबंधित तथ्यधारा 47हस्तलेख के बारे में राय कब सुसंगत हैधारा 47क[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] के बारे में राय कब सुसंगत हैधारा 48अधिकार या रूढ़ि के अस्तित्व के बारे में रायें कब सुसंगत हैंधारा 49प्रथाओं, सिद्धान्तों आदि के बारे में रायें कब सुसंगत हैंधारा 50नातेदारी के बारे में राय कब सुसंगत हैधारा 51राय के आधार कब सुसंगत हैंधारा 52सिविल मामलों में अध्यारोपित आचरण साबित करने के लिए शील विसंगत हैधारा 53दाण्डिक मामलों में प्रवर्तन अच्छा शील सुसंगत हैधारा 53ककतिपय मामलों में शील या पूर्व लैंगिक अनुभव के साक्ष्य का सुसंगत न होनाधारा 54उत्तर में होने के सिवाय पूर्वतन बुरा शील सुसंगत नहीं हैधारा 55नुकसानी पर प्रभाव डालने वाला शील
अध्याय 3 — तथ्य जिनका साबित किया जाना आवश्यक नहीं है3
अध्याय 4 — मौखिक साक्ष्य के विषय में2
अध्याय 5 — दस्तावेजी साक्ष्य के विषय में40
धारा 61दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु का सबूतधारा 62प्राथमिक साक्ष्यधारा 63द्वितीयिक साक्ष्यधारा 64दस्तावेजों का प्राथमिक साक्ष्य द्वारा साबित किया जानाधारा 65अवस्थाएं जिनमें दस्तावेजों के सम्बन्ध में द्वितीयिक साक्ष्य दिया जा सकेगाधारा 65कइलैक्ट्रानिक अभिलेख से संबंधित साक्ष्य के बारे में विशेष उपबंधधारा 65खइलैक्ट्रानिक अभिलेखों की ग्राह्यताधारा 66पेश करने की सूचना के बारे में नियमधारा 67जिस व्यक्ति के बारे में अभिकथित है कि उसने पेश की गई दस्तावेज को हस्ताक्षरित किया था या लिखा था उस व्यक्ति के हस्ताक्षर या हस्तलेख का साबित किया जानाधारा 67क[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] के बारे में सबूतधारा 68ऐसी दस्तावेज के निष्पादन का साबित किया जाना जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित हैधारा 69जब किसी भी अनुप्रमाणक साक्षी का पता न चले, तब सबूतधारा 70अनुप्रमाणित दस्तावेज के पक्षकार द्वारा निष्पादन की स्वीकृतिधारा 71जबकि अनुप्रमाणक साक्षी निष्पादन का प्रत्याख्यान करता है, तब सबूतधारा 72उस दस्तावेज का साबित किया जाना जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित नहीं हैधारा 73हस्ताक्षर, लेख या मुद्रा की तुलना अन्यों से जो स्वीकृत या साबित हैंधारा 73क[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] के सत्यापन के बारे में सबूतधारा 74लोक दस्तावेजेंधारा 75प्राइवेट दस्तावेजेंधारा 76लोक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियांधारा 77प्रमाणित प्रतियों के पेश करने द्वारा दस्तावेजों का सबूतधारा 78अन्य शासकीय दस्तावेजों का सबूतधारा 79प्रमाणित प्रतियों के असली होने के बारे में उपधारणाधारा 80साक्ष्य के अभिलेख के तौर पर पेश की गई दस्तावेजों के बारे में उपधारणाधारा 81राजपत्रों, समाचारपत्रों, पार्लमेंट के प्राइवेट ऐक्टों और अन्य दस्तावेजों के बारे में उपधारणाएंधारा 81कइलैक्ट्रानिक रूप में राजपत्र के बारे में उपधारणाधारा 82मुद्रा या हस्ताक्षर के सबूत के बिना इंग्लैंड में ग्राह्य दस्तावेज के बारे में उपधारणाधारा 83सरकार के प्राधिकार द्वारा बनाए गए मानचित्रों या रेखांकों के बारे में उपधारणाधारा 84विधियों के संग्रह और विनिश्चयों की रिपोर्टों के बारे में उपधारणाधारा 85मुख्तारनामों के बारे में उपधारणाधारा 85कइलैक्ट्रानिक करारों के बारे में उपधारणाधारा 85खइलैक्ट्रानिक अभिलेखों और [इलैक्ट्रानिक चिह्नक] के बारे में उपधारणाधारा 85ग[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्रों के बारे में उपधारणाधारा 86विदेशी न्यायिक अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों के बारे में उपधारणाधारा 87पुस्तकों, मानचित्रों और चार्टों के बारे में उपधारणाधारा 88तार संदेशों के बारे में उपधारणाधारा 88कइलैक्ट्रानिक संदेशों के बारे में उपधारणाधारा 89पेश न की गई दस्तावेजों के सम्यक् निष्पादन आदि के बारे में उपधारणाधारा 90तीस वर्ष पुरानी दस्तावेज के बारे में उपधारणाधारा 90कपांच वर्ष पुराने इलैक्ट्रानिक अभिलेखों के बारे में उपधारणा
अध्याय 6 — दस्तावेजी साक्ष्य द्वारा मौखिक साक्ष्य के अपवर्जन के विषय में10
धारा 91दस्तावेजों के रूप में लेखबद्ध संविदाओं, अनुदानों तथा संपत्ति के अन्य व्ययनों के निबन्धनों का साक्ष्यधारा 92मौखिक करार के साक्ष्य का अपवर्जनधारा 93संदिग्धार्थ दस्तावेज को स्पष्ट करने या उसका संशोधन करने के साक्ष्य का अपवर्जनधारा 94विद्यमान तथ्यों को दस्तावेज के लागू होने के विरुद्ध साक्ष्य का अपवर्जनधारा 95विद्यमान तथ्यों के सदंर्भ में अर्थहीन दस्तावेज के बारे में साक्ष्यधारा 96उस भाषा के लागू होने के बारे में साक्ष्य जो कई व्यक्तियों में से केवल एक को लागू हो सकती हैधारा 97तथ्यों के दो संवर्गों में से जिनमें से किसी एक को भी वह भाषा पूरी की पूरी ठीक-ठीक लागू नहीं होती, उसमें से एक को भाषा के लायू होने के बारे में साक्ष्यधारा 98न पढ़ी जा सकने वाली लिपि आदि के अर्थ के बारे में साक्ष्यधारा 99दस्तावेज के निबन्धनों में फेरफार करने वाले करार का साक्ष्य कौन दे सकेगाधारा 100भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के विल सम्बन्धी उपबन्धों की व्यावृत्ति
अध्याय 7 — सबूत के भार के विषय में18
धारा 101सबूत का भारधारा 102सबूत का भार किस पर होता हैधारा 103विशिष्ट तथ्य के बारे में सबूत का भारधारा 104साक्ष्य को ग्राह्य बनाने के लिए जो तथ्य साबित किया जाना हो, उसे साबित करने का भारधारा 105यह साबित करने का भार कि अभियुक्त का मामला अपवादों के अन्तर्गत आता हैधारा 106विशेषतः ज्ञात तथ्य को साबित करने का भारधारा 107उस व्यक्ति की मृत्यु साबित करने का भार जिसका तीस वर्ष के भीतर जीवित होना ज्ञात हैधारा 108यह साबित करने का भार कि वह व्यक्ति, जिसके बारे में सात वर्ष से कुछ सुना नहीं गया है, जीवित हैधारा 109भागीदारों, भू-स्वामी और अभिधारी, मालिक और अभिकर्ता के मामलों में सबूत का भारधारा 110स्वामित्व के बारे में सबूत का भारधारा 111उन संव्यवहारों में सद्भाव का साबित किया जाना जिनमें एक पक्षकार का सम्बन्ध सक्रिय विश्वास का हैधारा 111ककुछ अपराधों के बारे में उपधारणाधारा 112विवाहित स्थिति के दौरान में जन्म होना धर्मजत्व का निश्चायक सबूत हैधारा 113राज्यक्षेत्र के अध्यर्पण का सबूतधारा 113ककिसी विवाहित स्त्री द्वारा आत्महत्या के दुष्प्रेरण के बारे में उपधारणाधारा 113खदहेज मृत्यु के बारे में उपधारणाधारा 114न्यायालय किन्हीं तथ्यों का अस्तित्व उपधारित कर सकेगाधारा 114कबलात्संग के लिए कतिपय अभियोजन में सम्मति के न होने की उपधारणा
अध्याय 8 — विबन्ध3
अध्याय 9 — साक्षियों के विषय में17
धारा 118कौन साक्ष्य दे सकेगाधारा 119साक्षी का मौखिक रूप से संसूचित करने में असमर्थ होनाधारा 120सिविल वाद के पक्षकार और उनकी पत्नियां या पति । दाण्डिक विचारण के अधीन व्यक्ति का पति या पत्नीधारा 121न्यायाधीश और मजिस्ट्रेटधारा 122विवाहित स्थिति के दौरान में की गई संसूचनाएंधारा 123राज्य का कार्यकलापों के बारे में साक्ष्यधारा 124शासकीय संसूचनाएंधारा 125अपराधों के करने के बारे में जानकारीधारा 126वृत्तिक संसूचनाएंधारा 127धारा 126 दुभाषियों आदि को लागू होगीधारा 128साक्ष्य देने के लिए स्वयंमेव उद्यत होने से विशेषाधिकार अभित्यक्त नहीं हो जाताधारा 129विधि सलाहकारों से गोपनीय संसूचनाएंधारा 130जो साक्षी पक्षकार नहीं है उसके हक-विलेखों का पेश किया जानाधारा 131ऐसे दस्तावेजों या इलैक्ट्रानिक अभिलेखों का पेश किया जाना जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति, जिसका उन पर कब्जा है, पेश करने से इंकार कर सकता थाधारा 132इस आधार पर कि उत्तर उसे अपराध में फंसाएगा, साक्षी उत्तर देने से क्षम्य न होगाधारा 133सहअपराधीधारा 134साक्षियों की संख्या
अध्याय 10 — साक्षियों की परीक्षा के विषय में32
धारा 135साक्षियों के पेशकरण और उनकी परीक्षा का क्रमधारा 136न्यायाधीश साक्ष्य की ग्राह्यता के बारे में निश्चय करेगाधारा 137मुख्य परीक्षाधारा 138परीक्षाओं का क्रमधारा 139किसी दस्तावेज को पेश करने के लिए समनित व्यक्ति की प्रतिपरीक्षाधारा 140शील का साक्ष्य देने वाले साक्षीधारा 141सूचक प्रश्नधारा 142उन्हें कब नहीं पूछना चाहिएधारा 143उन्हें कब पूछा जा सकेगाधारा 144लेखबद्ध विषयों के बारे में साक्ष्यधारा 145पूर्वतन लेखबद्ध कथनों के बारे में प्रतिपरीक्षाधारा 146प्रतिपरीक्षा के विधिपूर्ण प्रश्नधारा 147साक्षी को उत्तर देने के लिए कब विवश किया जाएधारा 148न्यायालय विनिश्चित करेगा कि कब प्रश्न पूछा जाएगा और साक्षी को उत्तर देने के लिए कब विवश किया जाएगाधारा 149युक्तियुक्त आधारों के बिना प्रश्न न पूछा जाएगाधारा 150युक्तियुक्त आधारों के बिना प्रश्न पूछे जाने की अवस्था में न्यायालय की प्रक्रियाधारा 151अशिष्ट और कलंकात्मक प्रश्नधारा 152अपमानित या क्षुब्ध करने के लिए आशियत प्रश्नधारा 153सत्यवादिता परखने के प्रश्नों के उत्तरों का खण्डन करने के लिए साक्ष्य का अपवर्जनधारा 154पक्षकार द्वारा अपने ही साक्षी से प्रश्नधारा 155साक्षी की विश्वसनीयता पर अधिक्षेपधारा 156सुसंगत तथ्य के साक्ष्य की सम्पुष्टि करने की प्रवृत्ति रखने वाले प्रश्न ग्राह्य होंगेधारा 157उसी तथ्य के बारे में पश्चात्वर्ती अभिसाक्ष्य की संपुष्टि करने के लिए साक्षी के पूर्वतन कथन साबित किए जा सकेंगेधारा 158साबित कथन के बारे में, जो कथन धारा 32 या 33 के अधीन सुसंगत है, कौन सी बातें साबित की जा सकेंगीधारा 159स्मृति ताजी करनाधारा 160धारा 159 में वर्णित दस्तावेज में कथित तथ्यों के लिए परिसाक्ष्यधारा 161स्मृति ताजी करने के लिए प्रयुक्त लेख के बारे में प्रतिपक्षी का अधिकारधारा 162दस्तावेजों का पेश किया जानाधारा 163मंगाई गई और सूचना पर पेश की गई दस्तावेज का साक्ष्य के रूप में दिया जानाधारा 164सूचना पाने पर जिसे दस्तावेज के पेश करने से इंकार कर दिया गया है उसको साक्ष्य के रूप में उपयोग में लानाधारा 165प्रश्न करने या पेश करने का आदेश देने की न्यायाधीश की शक्तिधारा 166जूरी या असेसरों की प्रश्न करने की शक्ति
अध्याय 11 — साक्ष्य के अनुचित ग्रहण और अग्रहण के विषय में1
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