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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 5/103 / 185

90तीस वर्ष पुरानी दस्तावेज के बारे में उपधारणा

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 29–30

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

बीएसए से मिलान जल्द

1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।

जहां की कोई दस्तावेज, जिसका तीस वर्ष पुरानी होना तात्पर्यित है या साबित किया गया है, ऐसी किसी अभिरक्षा में से, जिसे न्यायालय उस विशिष्ट मामले में उचित समझता है, पेश की गई है, वहां न्यायालय यह उपधारित कर सकेगा कि ऐसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर और उसका हर अन्य भाग, जिसका किसी विशिष्ट व्यक्ति के हस्तलेख में होना तात्पर्यित है, उस व्यक्ति के हस्तलेख में है, और निष्पादित या अनुप्रमाणित दस्तावेज होने की दशा में यह उपधारित कर सकेगा कि वह उन व्यक्तियों द्वारा सम्यक् रूप में निष्पादित और अनुप्रमाणित की गई थी जिनके द्वारा उसका निष्पादित और अनुप्रमाणित होना तात्पर्यित है ।

स्पष्टीकरण—दस्तावेजों का उचित अभिरक्षा में होना कहा जाता है, यदि वे ऐसे स्थान में और उस व्यक्ति की देखरेख में हैं, जहां और जिसके पास वे प्रकृत्या होनी चाहिए, किन्तु कोई भी अभिरक्षा अनुचित नहीं है, यदि यह साबित कर दिया जाए कि उस अभिरक्षा का उद्गम विधिसम्मत था या यदि उस विशिष्ट मामले की परिस्थितियां ऐसी हों जिनसे ऐसा उद्गम अधिसम्भाव्य हो जाता है ।

यह स्पष्टीकरण धारा 81 को भी लागू है ।

दृष्टांत

(क) क भू-सम्पत्ति पर दीर्घकाल से कब्जा रखता आया है । यह उस भूमि सम्बन्धी विलेख, जिनसे उस भूमि पर उसका हक दर्शित होता है, अपनी अभिरक्षा में से पेश करता है । यह अभिरक्षा उचित है ।

(ख) क उस भू-सम्पत्ति से सम्बद्ध विलेख, जिनका वह बन्धकदार है, पेश करता है । बंधककर्ता सम्पत्ति पर कब्जा रखता है ।

यह अभिरक्षा उचित है ।

(ग) ख का संसंगी क, ख के कब्जे वाली भूमि से सम्बन्धित विलेख पेश करता है, जिन्हें ख ने उसके पास सुरक्षित अभिरक्षा के लिए निक्षिप्त किया था । यह अभिरक्षा उचित है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।