भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 5/69 / 185
65अवस्थाएं जिनमें दस्तावेजों के सम्बन्ध में द्वितीयिक साक्ष्य दिया जा सकेगा
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
किसी दस्तावेज के अस्तित्व, दशा या अन्तर्वस्तु का द्वितीयिक साक्ष्य निम्नलिखित अवस्थाओं में दिया जा सकेगा—
(क) जबकि यह दर्शित कर दिया जाए या प्रतीत होता हो कि मूल ऐसे व्यक्ति के कब्जे में या शक्त्यधीन है :—
जिसके विरुद्ध उस दस्तावेज का साबित किया जाना ईप्सित है, अथवा जो न्यायालय की आदेशिका की पहुंच से बाहर है, या ऐसी आदेशिका के अध्यधीन नहीं है, अथवा जो उसे पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध है,
और जब कि ऐसा व्यक्ति धारा 66 में वर्णित सूचना के पश्चात् उसे पेश नहीं करता है,
(ख) जब कि मूल के अस्तित्व, दशा या अन्तर्वस्तु को उस व्यक्ति द्वारा, जिसके विरुद्ध उसे साबित किया जाना है या उसके हित प्रतिनिधि द्वारा लिखित रूप में स्वीकृत किया जाना साबित कर दिया गया है,
(ग) जबकि मूल नष्ट हो गया है, या खो गया है अथवा जबकि उसकी अन्तर्वस्तु का साक्ष्य देने की प्रस्थापना करने वाला पक्षकार अपने स्वयं के व्यतिक्रम या उपेक्षा से अनुद्भूत अन्य किसी कारण से उसे युक्तियुक्त समय में पेश नहीं कर सकता,
(घ) जबकि मूल इस प्रकृति का है कि उसे आसानी से स्थानान्तरित नहीं किया जा सकता,
(ङ) जबकि मूल धारा 74 के अर्थ के अन्तर्गत एक लोक दस्तावेज है,
(च) जबकि मूल ऐसी दस्तावेज है जिसकी प्रमाणित प्रति का साक्ष्य में दिया जाना इस अधिनियम द्वारा या [भारत] में प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा अनुज्ञात है,
(छ) जबकि मूल ऐसे अनेक लेखाओं या अन्य दस्तावेजों से गठित है जिनकी न्यायालय में सुविधापूर्वक परीक्षा नहीं की जा सकती और वह तथ्य जिसे साबित किया जाना है सम्पूर्ण संग्रह का साधारण परिणाम है । अवस्थाओं (क), (ग) और (घ) में दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु का कोई भी द्वितीयिक साक्ष्य ग्राह्य है । अवस्था (ख) में वह लिखित स्वीकृति ग्राह्य है । अवस्था (ङ) या (च) में दस्तावेज की प्रमाणित प्रति ग्राह्य है, किन्तु अन्य किसी भी प्रकार का द्वितीयिक साक्ष्य ग्राह्य नहीं है ।
अवस्था (छ) में दस्तावेजों के साधारण परिणाम का साक्ष्य ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा दिया जा सकेगा जिसने उनकी परीक्षा की है और जो ऐसी दस्तावेजों की परीक्षा करने में कुशल है ।
संशोधन टिप्पणियां
- 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा “राज्यों” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891 (1891 का 18) की धारा 4 की तुलना करें ।
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