नई–पुरानी धाराmanzill.com
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 5/87 / 185

79प्रमाणित प्रतियों के असली होने के बारे में उपधारणा

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 27

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

बीएसए से मिलान जल्द

1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।

न्यायालय हर ऐसी दस्तावेज [का असली होना] उपधारित करेगा जो ऐसा प्रमाणपत्र, प्रमाणित प्रति या अन्य दस्तावेज होनी तात्पर्यित है जिसका किसी विशिष्ट तथ्य के साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होना विधि द्वारा घोषित है और जिसका [केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी आफिसर द्वारा या [जम्मू-कश्मीर राज्य के] किसी ऐसे आफिसर द्वारा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इसके लिए सम्यक् रूप से प्राधिकृत हो], सम्यक् रूप से प्रमाणित होना तात्पर्यित है :

परन्तु यह तब जबकि ऐसी दस्तावेज सारतः उस प्ररूप में हो तथा ऐसी रीति से निष्पादित हुई तात्पर्यित हो जो विधि द्वारा तन्निमित्त निर्दिष्ट है ।

न्यायालय यह भी उपधारित करेगा कि कोई आफिसर, जिसके द्वारा ऐसी दस्तावेज का हस्ताक्षरित या प्रमाणित होना तात्पर्यित है, वह पदीय हैसियत, जिसका वह ऐसे कागज में दावा करता है, उस समय रखता था जब उसने उसे हस्ताक्षरित किया था ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 द्वारा अन्तस्थापित ।
  2. भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937, भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 और विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा अनुक्रमशः संशोधन के तत्पश्चात् इनका वर्तमान रूप उपरोक्त है ।
  3. 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा “भाग ख राज्य में” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।