भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 5/67 / 185
63द्वितीयिक साक्ष्य
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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
द्वितीयिक साक्ष्य से अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत आते हैं—
(1) एतस्मिनपश्चात् अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अधीन दी हुई प्रमाणित प्रतियां;
(2) मूल से ऐसी यान्त्रिक प्रक्रियाओं द्वारा, जो प्रक्रियाएं स्वयं ही प्रति की शुद्धता सुनिश्चित करती हैं, बनाई गई प्रतियां तथा ऐसी प्रतियों से तुलना की हुई प्रतिलिपियां;
(3) मूल से बनाई गई या तुलना की गई प्रतियां;
(4) उन पक्षकारों के विरुद्ध, जिन्होंने उन्हें निष्पादित नहीं किया है, दस्तावेजों के प्रतिलेख;
(5) किसी दस्तावेज की अन्तर्वस्तु का उस व्यक्ति द्वारा, जिसने स्वयं उसे देखा है, दिया हुआ मौखिक वृत्तांत ।
दृष्टांत
(क) किसी मूल का फोटोचित्र, यद्यपि दोनों की तुलना न की गई हो तथापि यदि यह साबित किया जाता है कि फोटोचित्रित वस्तु मूल थी, उस मूल की अन्तर्वस्तु का द्वितीयिक साक्ष्य है ।
(ख) किसी पत्र की वह प्रति, जिसकी तुलना उस पत्र की, उस प्रति से कर ली गई है जो प्रतिलपि-यंत्र द्वारा तैयार की गई है, उस पत्र की अन्तर्वस्तु का द्वितीयिक साक्ष्य है, यदि यह दर्शित कर दिया जाता है कि प्रतिलिपि-यंत्र द्वारा तैयार की गई प्रति मूल से बनाई गई थी ।
(ग) प्रति की नकल करके तैयार की गई किन्तु तत्पश्चात् मूल से तुलना की हुई प्रतिलिपि द्वितीयिक साक्ष्य है किन्तु इस प्रकार तुलना नहीं की हुई प्रति मूल का द्वितीयिक साक्ष्य नहीं है, यद्यपि उस प्रति की, जिससे वह नकल की गई है, मूल से तुलना की गई थी ।
(घ) न तो मूल से तुलनाकृत प्रति का मौखिक वृत्तान्त और न मूल के किसी फोटोचित्र या यंत्रकृत प्रति का मौखिक वृत्तान्त मूल का द्वितीयिक साक्ष्य है ।
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- आगे धारा 76 देखें ।
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