भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 5/66 / 185
62प्राथमिक साक्ष्य
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
प्राथमिक साक्ष्य से न्यायालय के निरीक्षण के लिए पेश की गई दस्तावेज स्वयं अभिप्रेत है ।
स्पष्टीकरण 1—जहां कि कोई दस्तावेज कई मूल प्रतियों में निष्पादित है वहां हर एक मूल प्रति उस दस्तावेज का प्राथमिक साक्ष्य है ।
जहां कि कोई दस्तावेज प्रतिलेख में निष्पादित है और हर एक प्रतिलेख पक्षकारों में से केवल एक पक्षकार या कुछ पक्षकारों द्वारा निष्पादित किया गया है, वहां हर एक प्रतिलेख उन पक्षकारों के विरुद्ध, जिन्होंने उसका निष्पादन किया है, प्राथमिक साक्ष्य है ।
स्पष्टीकरण 2—जहां कि अनेक दस्तावेजें एकरूपात्मक प्रक्रिया द्वारा बनाई गई हैं जैसा कि मुद्रण, शिला मुद्रण या फोटो चित्रण में होता है, वहां उनमें से हर एक शेष सबकी अन्तर्वस्तु का प्राथमिक साक्ष्य है, किन्तु जहां कि वे सब किसी सामान्य मूल की प्रतियां हैं वहां वे मूल की अन्तर्वस्तु का प्राथमिक साक्ष्य नहीं है ।
दृष्टांत
यह दर्शित किया जाता है कि एक ही समय एक ही मूल से मुद्रित अनेक प्लेकार्ड किसी व्यक्ति के कब्जे में रखे हैं । इन प्लेकार्डों में से कोई भी एक अन्य किसी की भी अन्तर्वस्तु का प्राथमिक साक्ष्य है किन्तु उनमें से कोई भी मूल की अन्तर्वस्तु का प्राथमिक साक्ष्य नहीं है ।
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