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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 5/88 / 185

80साक्ष्य के अभिलेख के तौर पर पेश की गई दस्तावेजों के बारे में उपधारणा

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 27

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

बीएसए से मिलान जल्द

1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।

जब कभी किसी न्यायालय के समक्ष कोई ऐसी दस्तावेज पेश की जाती है, जिसका किसी न्यायिक कार्यवाही में, या विधि द्वारा ऐसा साक्ष्य लेने के लिए प्राधिकृत किसी आफिसर के समक्ष, किसी साक्षी द्वारा दिए गए साक्ष्य या साक्ष्य के किसी भाग का अभिलेख या ज्ञापन होना, अथवा किसी कैदी या अभियुक्त का विधि के अनुसार लिया गया कथन या संस्वीकृति होना तात्पर्यित हो और जिसका किसी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा या उपर्युक्त जैसे किसी आफिसर द्वारा हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित हो, तब न्यायालय यह उपधारित करेगा—

कि वह दस्तावेज असली है, कि उन परिस्थितियों के बारे में, जिनके अधीन वह लिया गया था, कोई भी कथन, जिनका उसको हस्ताक्षरित करने वाले व्यक्ति द्वारा किया जाना तात्पर्यित है, सत्य हैं तथा कि ऐसा साक्ष्य, कथन या संस्वीकृति सम्यक् रूप से ली गई थी ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।