भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 5/86 / 185
78अन्य शासकीय दस्तावेजों का सबूत
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 26–27
यह धारा बदल दी गई है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
निम्नलिखित लोक दस्तावेजें निम्नलिखित रूप से साबित की जा सकेंगी—
(1) [केन्द्रीय सरकार] के किसी विभाग के, [या क्राउन रिप्रेजेन्टेटिव] या किसी राज्य सरकार के, या किसी राज्य सरकार के किसी विभाग के कार्य, आदेश या अधिसूचनाएं,—
उन विभागों के अभिलेखों द्वारा, जो क्रमशः उन विभागों के मुख्य पदाधिकारियों द्वारा प्रमाणित हैं,
या किसी दस्तावेज द्वारा जो ऐसी किसी सरकार के [या यथास्थिति क्राउन रिप्रेजेन्टेटिव के] आदेश द्वारा मुद्रित हुई तात्पर्यित है;
(2) विधान-मण्डलों की कार्यवाहियां,—
क्रमशः इन निकायों के जर्नलों द्वारा या प्रकाशित अधिनियमों या संक्षिप्तियों द्वारा, या [सम्पृक्त सरकार के आदेश द्वारा] मुद्रित होना तात्पर्यित होने वाली प्रतियों द्वारा;
(3) हर मजेस्टी द्वारा या प्रिवी कौन्सिल द्वारा या हर मजेस्टी की सरकार के किसी विभाग द्वारा निकाली गई उद्घोषणाएं, आदेश या विनियम,— लन्दन गजट में अन्तर्विष्ट या कवीन्स प्रिंटर द्वारा मुद्रित होना तात्पर्यित होने वाली प्रतियों या उद्धरणों द्वारा;
(4) किसी विदेश की कार्यपालिका के कार्य या विधान मंडल की कार्यवाहियां,—
उनके प्राधिकार से प्रकाशित, या उस देश में सामान्यतः इस रूप में गृहीत, जर्नलों द्वारा, या उस देश या प्रभु की मुद्रा के अधीन प्रमाणित प्रति द्वारा, या किसी [केन्द्रीय अधिनियम] में उनकी मान्यता द्वारा;
(5) [किसी राज्य] के नगरपालिक निकाय की कार्यवाहियां,—
ऐसी कार्यवाहियों की ऐसी प्रति द्वारा, जो उनके विधिक पालक द्वारा प्रमाणित है, या ऐसे निकाय के प्राधिकार से प्रकाशित हुई तात्पर्यित होने वाली किसी मुद्रित पुस्तक द्वारा;
(6) किसी विदेश की किसी अन्य प्रकार की लोक दस्तावेजें,—
मूल द्वारा या उसके विधिक पालक द्वारा प्रमाणित किसी प्रति द्वारा, जिस प्रति के साथ किसी नोटरी पब्लिक की, या [भारतीय कौन्सल] या राजनयिक अभिकर्ता की मुद्रा के अधीन यह प्रमाणपत्र है कि वह प्रति मूल की विधिक अभिरक्षा रखने वाले आफिसर द्वारा सम्यक् रूप से प्रमाणित है, तथा उस दस्तावेज की प्रकृति उस विदेश की विधि के अनुसार साबित किए जाने पर ।
संशोधन टिप्पणियां
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा “ब्रिटिश भारत की कार्यपालिका सरकार” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा “सरकार के आदेश द्वारा” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- “हर मजेस्टी” शब्दों में परिवर्तन नहीं किया गया है । देखिए विधि अनुकूलन आदेश, 1950 ।
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा “भारत के सपरिषद् गवर्जन जनरल के लोक अधिनियम” स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “किसी प्रान्त” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “ब्रिटिश कौन्सल” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।