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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 7/116 / 185

102सबूत का भार किस पर होता है

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 33–34

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

बीएसए से मिलान जल्द

1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।

किसी वाद या कार्यवाही में सबूत का भार उस व्यक्ति पर होता है जो असफल हो जाएगा, यदि दोनों में से किसी भी ओर से कोई भी साक्ष्य न दिया जाए ।

दृष्टांत

(क) ख पर उस भूमि के लिए क वाद लाता है जो ख के कब्जे में है और जिसके बारे में क प्रख्यान करता है कि वह ख के पिता ग को विल द्वारा क के लिए दी गई थी ।

यदि किसी भी ओर से कोई साक्ष्य नहीं दिया जाए, तो ख इसका हकदार होगा कि वह अपना कब्जा रखे रहे ।

अतः सबूत का भार क पर है ।

(ख) ख पर एक बन्धपत्र मद्धे शोध्य धन के लिए क वाद लाता है ।

उस बन्धपत्र का निष्पादन स्वीकृत है किन्तु ख कहता है कि वह कपट द्वारा अभिप्राप्त किया गया था, जिस बात का क प्रत्याख्यान करता है ।

यदि दोनों में से किसी भी ओर से कोई साक्ष्य नहीं दिया जाए, तो क सफल होगा क्योंकि बन्धपत्र विवादग्रस्त नहीं है और कपट साबित नहीं किया गया ।

अतः सबूत का भार ख पर है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।