भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 7/119 / 185
105यह साबित करने का भार कि अभियुक्त का मामला अपवादों के अन्तर्गत आता है
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
जबकि कोई व्यक्ति किसी अपराध का अभियुक्त है, तब उन परिस्थितियों के अस्तित्व को साबित करने का भार, जो उस मामले को भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के साधारण अपवादों में से किसी के अन्तर्गत या उसी संहिता के किसी अन्य भाग में, या उस अपराध की परिभाषा करने वाली किसी विधि में, अन्तर्विष्ट किसी विशेष अपवाद या परन्तुक के अन्तर्गत कर देती है, उस व्यक्ति पर है और न्यायालय ऐसी परिस्थितियों के अभाव की उपधारणा करेगा ।
दृष्टांत
(क) हत्या का अभियुक्त, क अभिकथित करता है कि वह चित्तविकृति के कारण उस कार्य की प्रकृति नहीं जानता था ।
सबूत का भार क पर है ।
(ख) हत्या का अभियुक्त, क, अभिकथित करता है कि वह गम्भीर और अचानक प्रकोपन के कारण आत्मनियंत्रण की शक्ति से वंचित हो गया था ।
सबूत का भार क पर है ।
(ग) भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 325 उपबन्ध करती है कि जो कोई, उस दशा के सिवाय जिसके लिए धारा 335 में उपबन्ध है, स्वेच्छया घोर उपहति करेगा, वह अमुक दण्डों से दण्डनीय होगा ।
क पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने का, धारा 325 के अधीन आरोप है ।
इस मामले को धारा 335 के अधीन लाने वाली परिस्थितियों को साबित करने का भार क पर है ।
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