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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 7/115 / 185

101सबूत का भार

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यह धारा बदल दी गई है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

बीएसए से मिलान जल्द

1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।

जो कोई न्यायालय से यह चाहता है कि वह ऐसे किसी विधिक अधिकार या दायित्व के बारे में निर्णय दे, जो उन तथ्यों के अस्तित्व पर निर्भर है, जिन्हें वह प्राख्यान करता है, उसे साबित करना होगा कि उन तथ्यों का अस्तित्व है ।

जब कोई व्यक्ति किसी तथ्य का अस्तित्व साबित करने के लिए आबद्ध है, तब यह कहा जाता है कि उस व्यक्ति पर सबूत का भार है ।

दृष्टांत

(क) क न्यायालय से चाहता है कि वह ख को उस अपराध के लिए दण्डित करने का निर्णय दे जिसके बारे में क कहता है कि वह ख ने किया है ।

क को यह साबित करना होगा कि ख ने वह अपराध किया है ।

(ख) क न्यायालय से चाहता है कि न्यायालय उन तथ्यों के कारण जिनके सत्य होने का वह प्रख्यान और ख प्रात्याख्यान करता है, यह निर्णय दे कि वह ख के कब्जे में की अमुक भूमि का हकदार है ।

क को उन तथ्यों का अस्तित्व साबित करना होगा ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।