भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 7/132 / 185
114कबलात्संग के लिए कतिपय अभियोजन में सम्मति के न होने की उपधारणा
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 376 की उपधारा (2) के खंड (क), खंड (ख), खंड (ग), खंड (घ), खंड (ङ), खंड (च), खंड (छ), खंड (ज), खंड (झ), खंड (ञ), खंड (ट), खंड (ठ), खंड (ड) या खंड (ढ) के अधीन बलात्संग के लिए किसी अभियोजन में, जहां अभियुक्त द्वारा मैथुन किया जाना साबित हो जाता है और प्रश्न यह है कि क्या वह उस स्त्री की, जिसके बारे में यह अभिकथन किया गया है कि उससे बलात्संग किया गया है, सम्मति के बिना किया गया था और ऐसी स्त्री न्यायालय के समक्ष अपने साक्ष्य में यह कथन करती है कि उसने सम्मति नहीं दी थी, वहां न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि उसने सम्मति नहीं दी थी ।
स्पष्टीकरण—इस धारा में “मैथुन” से भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 375 के खण्ड (क) से खण्ड (घ) में वर्णित कोई कार्य अभिप्रेत होगा ।
संशोधन टिप्पणियां
- 2013 के अधिनियम सं० 13 की धारा 26 द्वारा (3-2-2013 से) प्रतिस्थापित ।
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