नई–पुरानी धाराmanzill.com
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 2/21 / 185

21स्वीकृतियों का उन्हें करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध और उनके द्वारा या उनकी ओर से साबित किया जाना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 10–11

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

बीएसए से मिलान जल्द

1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।

स्वीकृतियां उन्हें करने वाले व्यक्ति के या उसके हित प्रतिनिधि के विरुद्ध सुसंगत हैं और साबित की जा सकेंगी, किन्तु उन्हें करने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से या उसके हित प्रतिनिधि द्वारा निम्नलिखित अवस्थाओं में के सिवाय उन्हें साबित नहीं किया जा सकेगा—

(1) कोई स्वीकृति उसे करने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से तब साबित की जा सकेगी, जबकि वह इस प्रकृति की है कि यदि उसे करने वाला व्यक्ति मर गया होता, तो वह अन्य व्यक्तियों के बीच धारा 32 के अधीन सुसंगत होती ।

(2) कोई स्वीकृति उसे करने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से तब साबित की जा सकेगी, जबकि वह मन की या शरीर की सुसंगत या विवाद्य किसी दशा के अस्तित्व का ऐसा कथन है जो उस समय या उसके लगभग किया गया था जब मन की या शरीर की ऐसी दशा विद्यमान थी और ऐसे आचरण के साथ है जो उसकी असत्यता को अनधिसम्भाव्य कर देता है ।

(3) कोई स्वीकृति उसे करने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से साबित की जा सकेगी, यदि वह स्वीकृति के रूप में नहीं किन्तु अन्यथा सुसंगत है ।

दृष्टांत

(क) क और ख के बीच प्रश्न यह है कि अमुक विलेख कूटरचित है या नहीं । क प्रतिज्ञात करता है कि वह असली है, ख प्रतिज्ञात करता है कि वह कूटरचित है ।

ख का कोई कथन है कि विलेख असली है, क साबित कर सकेगा तथा क का कोई कथन कि विलेख कूटरचित है, ख साबित कर सकेगा । किन्तु क अपना यह कथन कि विलेख असली है साबित नहीं कर सकेगा और न ख ही अपना यह कथन कि विलेख कूटरचित है साबित कर सकेगा ।

(ख) किसी पोत के कप्तान, क का विचारण उस पोत को संत्यक्त करने के लिए किया जाता है ।

यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य दिया जाता है कि पोत अपने उचित मार्ग से बाहर ले जाया गया था ।

क अपने कारबार के मामूली अनुक्रम में अपने द्वारा रखी जाने वाली वह पुस्तक पेश करता है जिसमें वे संप्रेक्षण दर्शित हैं, जिनके बारे में यह अभिकथित है कि वे दिन प्रतिदिन किए गए थे और जिनसे उपदर्शित है कि पोत अपने उचित मार्ग से बाहर नहीं ले जाया गया था । क इन कथनों को साबित कर सकेगा क्योंकि, यदि उसकी मृत्यु हो गई होती तो वे कथन अन्य व्यक्तियों के बीच धारा 32, खण्ड (2) के अधीन ग्राह्य होते ।

(ग) क अपने द्वारा कलकत्ते में किए गए अपराध का अभियुक्त है ।

वह अपने द्वारा लिखित और उसी दिन लाहौर में दिनांकित और उसी दिन का लाहौर डाक-चिह्न धारण करने वाला पत्र पेश करता है ।

पत्र की तारीख में का कथन ग्राह्य है क्योंकि, यदि क की मृत्यु हो गई होती, तो वह धारा 32, खण्ड (2) के अधीन ग्राह्य होता ।

(घ) क चुराए हुए माल को यह जानते हुए कि वह चुराया हुआ है प्राप्त करने का अभियुक्त है ।

वह यह साबित करने की प्रस्थापना करता है कि उसने उसे उसके मूल्य से कम में बेचने से इन्कार किया था ।

यद्यपि ये स्वीकृतियां हैं तथापि क इन कथनों को साबित कर सकेगा, क्योंकि ये विवाद्यक तथ्यों से प्रभावित उसके आचरण के स्पष्टीकारक हैं ।

(ङ) क अपने कब्जे में कूटकृत सिक्का जिसका कूटकृत होना वह जानता था, कपटपूर्वक रखने का अभियुक्त है ।

वह यह साबित करने की प्रस्थापना करता है कि उसने एक कुशल व्यक्ति से उस सिक्के की परीक्षा करने को कहा था, क्योंकि उसे शंका थी कि वह कूटकृत है या नहीं और उस व्यक्ति ने उसकी परीक्षा की थी और उससे कहा था कि वह असली है ।

अन्तिम पूर्ववर्ती दृष्टांत में कथित कारणों से क इन तथ्यों को साबित कर सकेगा ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।