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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 2/27 / 185

26पुलिस की अभिरक्षा में होते हुए अभियुक्त द्वारा की गई संस्वीकृति का उसके विरुद्ध साबित न किया जाना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 12

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

बीएसए से मिलान जल्द

1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।

कोई भी संस्वीकृति, जो किसी व्यक्ति ने उस समय की हो जब वह पुलिस आफिसर की अभिरक्षा में हो, ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध साबित न की जाएगी जब तक, कि वह मजिस्ट्रेट की साक्षात् उपस्थिति में न की गई हो ।

[स्पष्टीकरण—इस धारा में “मजिस्ट्रेट” के अन्तर्गत फोर्ट सेन्ट जार्ज की प्रेसिडेन्सी में *** या अन्यत्र मजिस्ट्रेट के कृत्य निर्वहन करने वाला ग्रामणी नहीं आता है, जब तक कि वह ग्रामणी कोड आफ क्रिमिनल प्रोसिजर, 1882 (1882 का 10) के अधीन मजिस्ट्रेट की शक्तियों का प्रयोग करने वाला मजिस्ट्रेट न हो ।]

संशोधन टिप्पणियां

  1. इस धारा के प्रयोजनों के लिए कारोनर को मजिस्ट्रेट घोषित किया गया है—देखिए कारोनर अधिनियम, 1871 (1871 का 4) की धारा 20 ।
  2. 1891 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 द्वारा अन्तःस्थापित ।
  3. भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा “या बर्मा में” शब्दों का लोप किया गया ।
  4. देखिए अब दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) ।

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