भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 2/42 / 185
41प्रोबेट इत्यादि विषयक अधिकारिता के किन्हीं निर्णयों की सुसंगति
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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
किसी सक्षम न्यायालय के प्रोबेट-विषयक, विवाह-विषयक, नावधिकरण-विषयक या दिवाला-विषयक अधिकारिता के प्रयोग में दिया हुआ अन्तिम निर्णय, आदेश या डिक्री, जो किसी व्यक्ति को, या से, कोई विधिक हैसियत प्रदान करती या ले लेती है या जो सर्वतः न कि किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति के विरुद्ध किसी व्यक्ति को ऐसी किसी हैसियत का हकदार या किसी विनिर्दिष्ट चीज का हकदार घोषित करती है, तब सुसंगत हैं जब कि किसी ऐसी विधिक हैसियत, या किसी ऐसी चीज पर किसी ऐसे व्यक्ति के हक का अस्तित्व सुसंगत है ।
ऐसा निर्णय, आदेश या डिक्री इस बात का निश्चायक सबूत है—
कि कोई विधिक हैसियत, जो वह प्रदत्त करती है, उस समय प्रोद्भूत हुई जब ऐसा निर्णय, आदेश या डिक्री परिवर्तन में आई, कि कोई विधिक हैसियत, जिसके लिए वह किसी व्यक्ति को हकदार घोषित करती है उस व्यक्ति को उस समय प्रोद्भूत हुई जो समय ऐसे निर्णय, [आदेश या डिक्री] द्वारा घोषित है कि उस समय यह उस व्यक्ति को प्रोद्भूत हुई, कि कोई विधिक हैसियत, जिसे वह किसी ऐसे व्यक्ति से ले लेती है उस समय खत्म हुई जो समय ऐसे निर्णय, [आदेश या डिक्री] द्वारा घोषित है कि उस समय से वह हैसियत खत्म हो गई थी या खत्म हो जानी चाहिए, और कि कोई चीज जिसके लिए वह किसी व्यक्ति को ऐसा हकदार घोषित करती है उस व्यक्ति की उस समय सम्पत्ति थी जो समय ऐसे निर्णय, [आदेश या डिक्री] द्वारा घोषित है कि उस समय से वह चीज उसकी सम्पत्ति थी या होनी चाहिए ।
संशोधन टिप्पणियां
- 1872 के अधिनियम सं० 18 की धारा 3 द्वारा अन्तःस्थापित ।
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