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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 2/35 / 185

34लेखा पुस्तकों की प्रविष्टियां कब सुसंगत हैं

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यह धारा बदल दी गई है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

बीएसए से मिलान जल्द

1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।

कारबार के अनुक्रम में नियमित रूप से रखी गई [लेखा पुस्तकों की प्रविष्टियां2, जिनके अन्तर्गत वे भी हैं जो इलैक्ट्रानिक रूप में रखी गई हों,] जब कभी वे ऐसे विषय का निर्देश करती हैं जिसमें न्यायालय को जांच करनी है, सुसंगत हैं, किन्तु अकेले ऐसे कथन ही किसी व्यक्ति को दायित्व से भारित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं होंगे ।

दृष्टांत

ख पर क 1,000 रुपयों के लिए वाद लाता है और अपनी लेखा बहियों की वे प्रवष्टियां दर्शित करता है, जिनमें ख को इस रकम के लिए उसका ऋणी दर्शित किया गया है । ये प्रविष्टियां सुसंगत हैं किन्तु ऋण साबित करने के लिए अन्य साक्ष्य के बिना पर्याप्त नहीं हैं ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. 2000 के अधिनियम सं० 21 की धारा 92 और दूसरी अनुसूची द्वारा (17-10-2000 से) प्रतिस्थापित ।
  2. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 5), अनुसूची 1 के आदेश 7 के नियम 17 की तुलना करें । बैककारा की बहियों में भी प्रविष्टियों की प्रमाणित प्रतियों की साक्ष्य में ग्राह्यता के बारे में बैंककर बही साक्ष्य अधिनियम 1891 (1891 का 18) की धारा 4 देखिए ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।