भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 2/10 / 185
10सामान्य परिकल्पना के बारे में षड्यंत्रकारी द्वारा कही या की गई बातें
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
जहां कि यह विश्वास करने का युक्तियुक्त आधार है कि दो या अधिक व्यक्तियों ने अपराध या अनुयोज्य दोष करने के लिए मिलकर षड्यंत्र किया है, वहां उनके सामान्य आशय के बारे में उनमें से किसी एक व्यक्ति द्वारा उस समय के पश्चात्, जब ऐसा आशय उनमें से किसी एक ने प्रथम बार मन में धारण किया, कही, की, या लिखी गई कोई बात उन व्यक्तियों में से हर एक व्यक्ति के विरुद्ध, जिनके बारे में विश्वास किया जाता है कि उन्होंने इस प्रकार षड्यंत्र किया है, षड्यंत्र का अस्तित्व साबित करने के प्रयोजनार्थ उसी प्रकार सुसंगत तथ्य है जिस प्रकार यह दर्शित करने के प्रयोजनार्थ कि ऐसा कोई व्यक्ति उसका पक्षकार था ।
दृष्टांत
यह विश्वास करने का युक्तियुक्त आधार है कि क [भारत सरकार] के विरुद्ध युद्ध करने के षड्यंत्र में सम्मिलित हुआ है ।
ख ने उस षड्यंत्र के प्रयोजनार्थ यूरोप में आयुध उपाप्त किए, ग ने वैसे ही उद्देश्य से कलकत्ते में धन संग्रह किया, घ ने मुम्बई में लोगों को उस षड्यंत्र में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित किया, ड ने आगरे में उस उद्देश्य के पक्षपोषण में लेख प्रकाशित किए और ग द्वारा कलकत्ते में संगृहीत धन को च ने दिल्ली से छ के पास काबुल भेजा इन तथ्यों और उस षड्यंत्र का वृत्तान्त देने वाले झ द्वारा लिखित पत्र की अन्तर्वस्तु में से हर एक षड्यंत्र का अस्तित्व साबित करने के लिए तथा उसमें क की सहअपराधिता साबित करने के लिए भी सुसंगत है, चाहे वह उन सभी के बारे में अनभिज्ञ रहा हो और चाहे उन्हें करने वाले व्यक्ति उसके लिए अपरिचित रहे हों और चाहे वे उसके षड्यंत्र में सम्मिलित होने से पूर्व या उसके षड्यंत्र से अलग हो जाने के पश्चात् घटित हुए हों ।
संशोधन टिप्पणियां
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “क्वीन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
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