भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 2/31 / 185
30साबित संस्वीकृति को, जो उसे करने वाले व्यक्ति तथा एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित अन्य को प्रभावित करती है विचार में लेना
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
जबकि एक से अधिक व्यक्ति एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित हैं तथा ऐसे व्यक्तियों में से किसी एक के द्वारा, अपने को और ऐसे व्यक्तियों में से किसी अन्य को प्रभावित करने वाली की गई संस्वीकृति को साबित किया जाता है, तब न्यायालय ऐसी संस्वीकृति को ऐसे अन्य व्यक्ति के विरुद्ध तथा ऐसे संस्वीकृति करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध विचार में ले सकेगा ।
[स्पष्टीकरण—इस धारा में प्रयुक्त “अपराध” शब्द के अन्तर्गत उस अपराध का दुष्प्रेरण या उसे करने का प्रयत्न आता है । ]
दृष्टांत
(क) क और ख को ग की हत्या के लिए संयुक्ततः विचारित किया जाता है । यह साबित किया जाता है कि क ने कहा, “ख और मैंने ग की हत्या की है ।” ख के विरुद्ध इस संस्वीकृति के प्रभाव पर न्यायालय विचार कर सकेगा ।
(ख) ग की हत्या करने के लिए क का विचारण हो रहा है । यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य है कि ग की हत्या क और ख द्वारा की गई थी कि ख ने कहा था कि “क और मैंने ग की हत्या की है” ।
न्यायालय इस कथन को क के विरुद्ध विचारार्थ नहीं ले सकेगा, क्योंकि ख संयुक्ततः विचारित नहीं हो रहा है ।
संशोधन टिप्पणियां
- 1891 के अधिनियम सं० 3 की धारा 4 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- देखिए भारतीय दंड संहिता (1860 का 45), धारा 108 का स्पष्टीकरण सं० 4 ।
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