भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 2/38 / 185
37किन्हीं अधिनियमों या अधिसूचनाओं में अन्तर्विष्ट लोक प्रकृति के तथ्य के बारे में कथन की सुसंगति
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
जब कि न्यायालय को किसी लोक प्रकृति के तथ्य के अस्तित्व के बारे में राय बनानी है तब [यूनाइटेड किंगडम की] पार्लमेन्ट के ऐक्ट में या किसी [केन्द्रीय अधिनियम, प्रान्तीय अधिनियम या] [राज्य अधिनियम में] या शासकीय राजपत्र में प्रकाशित किसी सरकारी अधिसूचना या क्राउन रिप्रेजेन्टेटिव द्वारा की गई अधिसूचना में या लन्दन गजट या हिज मेजेस्टी के किसी डोमिनियन, उपनिवेश या कब्जाधीन क्षेत्र का सरकारी राजपत्र तात्पर्यित होने वाले किसी मुद्रित पत्र में अन्तर्विष्ट परिवर्णन में किया गया उसका कोई कथन [सुसंगत तथ्य है] ।
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संशोधन टिप्पणियां
- विधि अनुकूल आदेश, 1950 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- “सपरिषद् गवर्नर जनरल का, या मद्रास अथवा मुम्बई के सपरिषद् गवर्नर का या बंगाल के सपरिषद् लेफ्टिनेंट गवर्नर का अधिनियम, या भारत के राजपत्र में प्रकाशित होने वाली सरकार की अधिसूचना में या किसी स्थानीय सरकार के राजपत्र में या लन्दन गजेट अथवा क्वीन के किसी उपनिवेश या कब्जाधीन क्षेत्र के सरकारी राजपत्र में तात्पर्यित होने वाले किसी मुद्रित पत्र के सुसंगत तथ्य” मूल शब्दों का संशोधन निरसन और संशोधन अधिनियम, 1914 (1914 के अधिनियम सं० 10) तत्पश्चात् भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937, भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 तथा विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा संशोधित करके उपरोक्त रूप में आया ।
- 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा “भाग क राज्य या भाग ग राज्य के विधान-मंडल के अधिनियम” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1914 के अधिनियम सं० 10 की धारा 3 और अनुसूची 2 द्वारा अन्तिम पैरे का लोप किया गया ।
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