भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 10/164 / 185
146प्रतिपरीक्षा के विधिपूर्ण प्रश्न
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
जब कि किसी साक्षी से प्रतिपरीक्षा की जाती है, तब उससे एतस्मिन्पूर्व निर्दिष्ट प्रश्नों के अतिरिक्त ऐसे कोई भी प्रश्न पूछे जा सकेंगे जिनकी प्रवृत्ति—
(1) उसकी सत्यवादिता परखने की है,
(2) यह पता चलाने की है कि वह कौन है और जीवन में उसकी स्थिति क्या है, अथवा
(3) उसके शील को दोष लगाकर उसकी विश्वसनीयता को धक्का पहुंचाने की है, चाहे ऐसे प्रश्नों का उत्तर उसे प्रत्यक्षतः या परोक्षतः अपराध में फंसाने की प्रवृत्ति रखता हो, या उसे किसी शास्ति या समपहरण के लिए उच्छन्न करता हो या प्रत्यक्षतः या परोक्षतः उच्छन्न करने की प्रवृत्ति रखता हो :
[परन्तु भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 376, धारा 376क, धारा 376ख, धारा 376ग, धारा 376घ, या धारा 376ङ के अधीन किसी अपराध के लिए या ऐसे किसी अपराध के किए जाने का प्रयत्न करने के लिए किसी अभियोजन में, जहां सम्मति का प्रश्न विवाद्य है वहां पीड़िता की प्रतिपरीक्षा में उसके साधारण व्यभिचार या किसी व्यक्ति के साथ पूर्व लैंगिक अनुभव के बारे में ऐसी सम्मति या सम्मति की प्रकृति के लिए साक्ष्य देना या प्रश्नों को पूछना अनुज्ञेय नहीं होगा ।]
संशोधन टिप्पणियां
- 2003 के अधिनियम सं० 4 की धारा 2 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था और इसके स्थान पर 2013 के अधिनियम सं० 13 की धारा 28 द्वारा (13-2-2013 से) प्रतिस्थापित ।
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