भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 10/166 / 185
148न्यायालय विनिश्चित करेगा कि कब प्रश्न पूछा जाएगा और साक्षी को उत्तर देने के लिए कब विवश किया जाएगा
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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
यदि ऐसा कोई प्रश्न ऐसी बात से संबंधित है, जो उस बात या कार्यवाही से वहां तक के सिवाय, जहां तक कि वह साक्षी के शील को दोष लगाकर उसकी विश्वसनीयता पर प्रभाव डालती है, सुसंगत नहीं है, तो न्यायालय विनिश्चित करेगा कि साक्षी को उत्तर देने के लिए विवश किया जाए या नहीं और यदि वह ठीक समझे, तो साक्षी को सचेत कर सकेगा कि वह उसका उत्तर देने के लिए आबद्ध नहीं है । अपने विवेक का प्रयोग करने में न्यायालय निम्नलिखित विचारों को ध्यान में रखेगा :—
(1) ऐसे प्रश्न उचित हैं, यदि वे ऐसी प्रकृति के हैं कि उनके द्वारा प्रवहण किए गए लांछन की सत्यता उस विषय में, जिसका वह साक्षी परिसाक्ष्य देता है, साक्षी की विश्वसनीयता के बारे में न्यायालय की राय पर गम्भीर प्रभाव डालेगी;
(2) ऐसे प्रश्न अनुचित हैं, यदि उनके द्वारा प्रवहण किया गया लांछन ऐसी बातों के संबंध में है जो समय में उतनी अतीत हैं या जो इस प्रकार की है कि लांछन की सत्यता उस विषय में, जिसका वह साक्षी परिसाक्ष्य देता है, साक्षी की विश्वसनीयता के बारे में न्यायालय की राय पर प्रभाव नहीं डालेगी या बहुत थोड़ी मात्रा में प्रभाव डालेगी;
(3) ऐसे प्रश्न अनुचित हैं, यदि साक्षी के शील के विरुद्ध किए गए लांछन के महत्व और उसके साक्ष्य के महत्व के बीच भारी अननुपात है;
(4) न्यायालय, यदि वह ठीक समझे, साक्षी के उत्तर देने से इंकार करने पर यह अनुमान लगा सकेगा कि उत्तर यदि दिया जाता तो, प्रतिकूल होता ।
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