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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 10/182 / 185

164सूचना पाने पर जिसे दस्तावेज के पेश करने से इंकार कर दिया गया है उसको साक्ष्य के रूप में उपयोग में लाना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 46

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

बीएसए से मिलान जल्द

1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।

जबकि कोई पक्षकार ऐसी किसी दस्तावेज को पेश करने से इन्कार कर देता है, जिसे पेश करने की उसे सूचना मिल चुकी है, तब वह तत्पश्चात् उस दस्तावेज को दूसरे पक्षकार की सम्मति के या न्यायालय के आदेश के बिना साक्ष्य के रूप में उपयोग में नहीं ला सकेगा ।

दृष्टांत

ख पर किसी करार के आधार पर क वाद लाता है और वह ख को उसे पेश करने की सूचना देता है । विचारण में क उस दस्तावेज की मांग करता है और ख उसे पेश करने से इंकार करता है । क उसकी अन्तर्वस्तु का द्वितीयिक साक्ष्य देता है । क द्वारा दिए हुए द्वितीयिक साक्ष्य का खण्डन करने के लिए या यह दर्शित करने के लिए कि वह करार स्टाम्पित नहीं है, ख दस्तावेज ही को पेश करना चाहता है । यह ऐसा नहीं कर सकता ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।