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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 10/167 / 185

149युक्तियुक्त आधारों के बिना प्रश्न न पूछा जाएगा

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 43

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

बीएसए से मिलान जल्द

1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।

कोई भी ऐसा प्रश्न, जैसा धारा 148 में निर्दिष्ट है, नहीं पूछा जाना चाहिए, जब तक कि पूछने वाले व्यक्ति के पास यह सोचने के लिए युक्तियुक्त आधार न हो कि यह लांछन, जिसका उससे प्रवहण होता है, सुआधारित है ।

दृष्टांत

(क) किसी बैरिस्टर को किसी अटर्नी या वकील द्वारा अनुदेश दिया गया है कि एक महत्वपूर्ण साक्षी डकैत है । उस साक्षी से यह पूछने के लिए कि क्या वह डकैत है, यह युक्तियुक्त आधार है ।

(ख) किसी वकील को न्यायालय में किसी व्यक्ति द्वारा जानकारी दी जाती है कि एक महत्वपूर्ण साक्षी डकैत है । जानकारी देने वाला वकील द्वारा प्रश्न किए जाने पर अपने कथन के लिए समाधानप्रद कारण बताता है । उस साक्षी से यह पूछने के लिए कि क्या वह डकैत है, यह युक्तियुक्त आधार है ।

(ग) किसी साक्षी से, जिसके बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है, अटकलपच्चू पूछा जाता है कि क्या वह डकैत है । यहां इस प्रश्न के लिए कोई युक्तियुक्त आधार नहीं है ।

(घ) कोई साक्षी, जिसके बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है, अपने जीवन के ढंग और जीविका के साधनों के बारे में पूछे जाने पर असमाधानप्रद उत्तर देता है । उससे यह पूछने का कि क्या वह डकैत है यह युक्तियुक्त आधार हो सकता है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।