भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 6/106 / 185
92मौखिक करार के साक्ष्य का अपवर्जन
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
जबकि किसी ऐसी संविदा, अनुदान या सम्पत्ति के अन्य व्ययन के निबन्धनों को, या किसी बात को, जिसके बारे में विधि द्वारा अपेक्षित है कि वह दस्तावेज के रूप में लेखबद्ध की जाए, अंतिम पिछली धारा के अनुसार साबित किया जा चुका हो, तब किसी ऐसी लिखत के पक्षकारों या उनके हित प्रतिनिधियों के बीच के किसी मौखिक करार या कथन का कोई भी साक्ष्य उसके निबन्धनों का खण्डन करने के या उनमें फेरफार करने के या जोड़ने के या उनमें से घटाने के प्रयोजन के लिए ग्रहण न किया जाएगा :
परन्तुक (1)—ऐसा कोई तथ्य साबित किया जा सकेगा, जो किसी दस्तावेज को अविधिमान्य बना दे या जो किसी व्यक्ति को तत्सम्बन्धी किसी डिक्री या आदेश का हकदार बना दे, यथा कपट, अभित्रास, अवैधता, सम्यक् निष्पादन का अभाव, किसी संविदाकारी पक्षकार में सामर्थ्य का अभाव, प्रतिफल का [अभाव या निष्फलता] या विधि की या तथ्य की भूल ।
परन्तुक (2)—किसी विषय के बारे में, जिसके बारे में दस्तावेज मौन है और जो उसके निबन्धनों से असंगत नहीं है, किसी पृथक् मौखिक करार या अस्तित्व साबित किया जा सकेगा । इस पर विचार करते समय कि यह परन्तुक लागू होता है या नहीं न्यायालय दस्तावेज की प्ररूपिता की मात्रा को ध्यान में रखेगा ।
परन्तुक (3)—ऐसी किसी संविदा, अनुदान या सम्पत्ति के व्ययन के अधीन कोई बाध्यता संलग्न होने की पुरोभाव्य शर्त गठित करने वाले किसी पृथक् मौखिक करार का अस्तित्व साबित किया जा सकेगा ।
परन्तुक (4)—ऐसी किसी संविदा, अनुदान या सम्पत्ति के व्ययन को विखंडित या उपांतरित करने के लिए किसी सुभिन्न पाश्चिक मौखिक करार का अस्तित्व उन अवस्थाओं के सिवाय साबित किया जा सकेगा, जिनमें विधि द्वारा अपेक्षित है कि ऐसी संविदा, अनुदान या सम्पत्ति का व्ययन लिखित हो अथवा जिनमें दस्तावेज के रजिस्ट्रीकरण के बारे में तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार उसका रजिस्ट्रीकरण किया जा चुका है ।
परन्तुक (5)—कोई प्रथा या रूढ़ि, जिसके द्वारा किसी संविदा में अभिव्यक्त रूप से वर्णित न होने वाली प्रसंगतियां उस प्रकार की संविदाओं से प्रायः उपाबद्ध रहती हैं, साबित की जा सकेगी :
परन्तु यह तब जबकि ऐसी प्रसंगतियों का उपाबन्धन संविदा के अभिव्यक्त निबन्धनों के विरुद्ध या उनसे असंगत न हो ।
परन्तुक (6)—कोई तथ्य, जो यह दर्शित करता है कि किसी दस्तावेज की भाषा वर्तमान तथ्यों से किस प्रकार सम्बन्धित है, साबित किया जा सकेगा ।
दृष्टांत
(क) बीमा की एक पालिसी इस माल के लिए की गई है जो “कलकत्ते से लन्दन जाने वाले पोतों में” है । माल किसी विशिष्ट पोत से भेजा जाता है, जो पोत नष्ट हो जाता है । यह तथ्य कि वह विशिष्ट पोत उस पालिसी से मौखिक रूप से अपवादित था साबित नहीं किया जा सकता ।
(ख) ख को पहली मार्च, 1873 को 1,000 रुपए देने का पक्का लिखित करार क करता है । यह तथ्य कि उसी समय एक मौखिक करार हुआ था कि यह धन इकतीस मार्च तक न दिया जाएगा, साबित नहीं किया जा सकता ।
(ग) “रामपुर चाय सम्पदा” नामक एक सम्पदा किसी विलेख द्वारा बेची जाती है, जिसमें विक्रीत सम्पत्ति का मानचित्र अन्तर्विष्ट है । यह तथ्य कि मानचित्र में न दिखाई गई भूमि सदैव सम्पदा का भागरूप मानी जाती रही थी और उस विलेख द्वारा उसका अन्तरित होना अभिप्रेत था, साबित नहीं किया जा सकता ।
(घ) क किन्हीं खानों को, जो ख की सम्पत्ति हैं, किन्हीं निबन्धनों पर काम में लाने का ख से लिखित करार करता है । उनके मूल्य के बारे में ख के दुर्व्यपदेशन द्वारा क ऐसा करने के लिए उत्प्रेरित हुआ था । यह तथ्य साबित किया जा सकेगा ।
(ङ) ख पर क किसी संविदा के विनिर्दिष्ट पालन के लिए वाद संस्थित करता है और यह प्रार्थना भी करता है कि संविदा का सुधार उसके एक उपबन्ध के बारे में किया जाए क्योंकि वह उपबन्ध उसमें भूल से अन्तःस्थापित किया गया था । क साबित कर सकेगा कि ऐसी भूल की गई थी जिससे संविदा के सुधार करने का हक उसे विधि द्वारा मिलता है ।
(च) क पत्र द्वारा ख का माल आदिष्ट करता है जिसमें संदाय करने के समय के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है और परिदान पर माल को प्रतिगृहीत करता है । ख मूल्य के लिए क पर वाद लाता है । क दर्शित कर सकेगा कि माल ऐसी अवधि के लिए उधार पर दिया गया था जो अभी अनवसित नहीं हुई है ।
(छ) ख को क एक घोडा बेचता है और मौखिक वारण्टी देता है कि वह अच्छा है । ख को क इन शब्दों को लिख कर एक कागज देता है । “क से 500 रुपए में एक घोड़ा खरीदा” । ख मौखिक गारन्टी साबित कर सकेगा ।
(ज) ख का बासा क भाडे पर लेता है और एक कार्ड देता है जिसमें लिखा है, “कमरे, 200 रुपए प्रतिमास” । क यह मौखिक करार साबित कर सकेगा कि इन निबन्धनों के अन्तर्गत भागतः भोजन भी था ।
ख का बासा क एक वर्ष के लिए भाड़े पर लेता है और उनके बीच अटर्नी द्वारा तैयार किया हुआ एक स्टाम्पित करार किया जाता है । वह करार भोजन देने के विषय में मौन है । क साबित नहीं कर सकेगा कि मौखिक तौर पर उस निबन्धन के अन्तर्गत भोजन देना भी था ।
(झ) ख से शोध्य ऋण के लिए धन की रसीद भेज कर ऋण चुकाने का क आवेदन करता है । ख रसीद रख लेता है और धन नहीं भेजता । उस रकम के लिए वाद में क इसे साबित कर सकेगा ।
(ञ) क और ख लिखित संविदा करते हैं जो अमुक अनिश्चित घटना के घटित होने पर प्रभावशील होनी है । वह लेख ख के पास छोड़ दिया जाता है जो उसके आधार पर क पर वाद लाता है । क उन परिस्थितियों को दर्शित कर सकेगा जिनके अधीन वह परिदत्त किया गया था ।
संशोधन टिप्पणियां
- 1872 के अधिनियम सं० 18 की धारा 8 द्वारा “निष्फलता का अभाव” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
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