भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 1/1 / 185
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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
यह अधिनियम भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 कहा जा सकेगा ।
इसका विस्तार [जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय] सम्पूर्ण भारत पर है और यह किसी न्यायालय में या के समक्ष की जिसके अन्तर्गत [आर्मी ऐक्ट (44 तथा 45 विक्टो, अ० 58) [नेवल डिसिप्लिन ऐक्ट (29 तथा 30 विक्टो 109) या इण्डियन नेवी (डिसिप्लिन) ऐक्ट, 1934 (1934 का 34)] *** [या एअर फोर्स ऐक्ट (7 जा० 5, अ० 51)] के अधीन संयोजित सेना न्यायालयों से भिन्न] सेना न्यायालय आते हैं, समस्त न्यायिक कार्यवाहियों को लागू है, किन्तु न तो किसी न्यायालय या आफिसर के समक्ष पेश किए शपथ-पत्रों को और न किसी मध्यस्थ के समक्ष की कार्यवाहियों को लागू है;
और यह 1872 के सितम्बर के प्रथम दिन को प्रवृत्त होगा ।
संशोधन टिप्पणियां
- यह अधिनियम 1963 के विनियम सं० 11 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा गोवा, दमण और दीव पर विस्तारित किया गया, 1963 के विनियम सं० 6 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा (1-7-1965 से) दादरा और नागर हवेली पर और 1965 के विनियम सं० 8 द्वारा (1-10-1967 से) सम्पूर्ण लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र पर विस्तारित एवं प्रवृत्त हुआ । यह अधिनियम 1-10-1963 से पांडिचेरी में प्रवृत्त हुआ, देखिए 1963 के विनियम सं० 7 की धारा 3 और अनुसूची 1, इस अधिनियम का संशोधन 1960 के पश्चिमी बंगाल अधिनियम सं० 20 द्वारा पश्चिमी बंगाल में तथा 1979 के तमिलनाडु अधिनियम सं० 67 द्वारा तमिलनाडु में किया गया ।
- 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा “भाग ख राज्यों के सिवाय” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1919 के अधिनियम सं० 18 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा अन्तःस्थापित । देखिए सेना अधिनियम (44 तथा 45 ऐक्ट, अध्याय 58) की धारा 127 ।
- 1934 के अधिनियम सं० 35 की धारा 2 और अनुसूची द्वारा अन्तःस्थापित ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “द्वारा यथा संशोधित उस अधिनियम” शब्द निरसित किए गए ।
- 1927 के अधिनियम सं० 10 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- शपथ पत्रों से संबंधित प्रथा के बारे में देखिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की धारा 30 (ग) और अनुसूची 1, आदेश 19; दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 295 और धारा 297 ।
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