भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872/अध्याय 4/64 / 185
60मौखिक साक्ष्य प्रत्यक्ष होना चाहिए
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
बीएसए से मिलान जल्द1 जुलाई 2024 से ठीक पहले लंबित आवेदन, विचारण, जांच, अन्वेषण, कार्यवाही या अपील इसी पुराने अधिनियम के अनुसार निपटाए जाते हैं (बीएसए धारा 170)।
मौखिक साक्ष्य, समस्त अवस्थाओं में चाहे वे कैसी ही हों, प्रत्यक्ष ही होगा, अर्थात् :—
यदि वह किसी देखे जा सकने वाले तथ्य के बारे में है, तो वह ऐसे साक्षी का ही साक्ष्य होगा जो कहता है कि उसने उसे देखा;
यदि वह किसी सुने जा सकने वाले तथ्य के बारे में है, तो वह ऐसे साक्षी का ही साक्ष्य होगा जो कहता है कि उसने उसे सुना;
यदि वह किसी ऐसे तथ्य के बारे में है जिसका किसी अन्य इंद्रिय द्वारा या किसी अन्य रीति से बोध हो सकता था, तो वह ऐसे साक्षी का ही साक्ष्य होगा जो कहता है कि उसने उसका बोध उस इंद्रिय द्वारा या उस रीति से किया;
यदि वह किसी राय के, या उन आधारों के, जिन पर वह राय धारित है, बारे में है, तो वह उस व्यक्ति का ही साक्ष्य होगा जो वह राय उन आधारों पर धारण करता है :
परन्तु विशेषज्ञों की रायें, जो सामान्यतः विक्रय के लिए प्रस्थापित की जाने वाली किसी पुस्तक में अभिव्यक्त हैं, और वे आधार, जिन पर ऐसी राय धारित हैं, यदि रचयिता मर गया है, या वह मिल नहीं सकता है या वह साक्ष्य देने के लिए असमर्थ हो गया है या उसे इतने विलम्ब या व्यय के बिना जितना न्यायालय अयुक्तियुक्त समझता है, साक्षी के रूप में बुलाया नहीं जा सकता हो, ऐसी पुस्तकों को पेश करके साबित किए जा सकेंगे :
परन्तु यह भी कि यदि मौखिक साक्ष्य दस्तावेज से भिन्न किसी भौतिक चीज के अस्तित्व या दशा के बारे में है, तो न्यायालय, यदि वह ठीक समझे, ऐसी भौतिक चीज का अपने निरीक्षणार्थ पेश किया जाना अपेक्षित कर सकेगा ।
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