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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 9/176 / 570

166कलोक सेवक, जो विधि के अधीन निदेश की अवज्ञा करता है

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 30स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई लोक सेवक होते हुए,—

(क) विधि के किसी ऐसे निदेश की, जो उसको किसी अपराध या किसी अन्य मामले में अन्वेषण के प्रयोजन के लिए, किसी व्यक्ति की किसी स्थान पर उपस्थिति की अपेक्षा किए जाने से प्रतिषिद्ध करता है, जानते हुए अवज्ञा करेगा ; या

(ख) किसी ऐसी रीति को, जिसमें वह ऐसा अन्वेषण करेगा, विनियमित करने वाली विधि के किसी अन्य निदेश की, किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए, जानते हुए अवज्ञा करेगा ; या

(ग) धारा 326क, धारा 326ख, धारा 354, धारा 354ख, धारा 370, धारा 370क, धारा 376, धारा 376क, [धारा 376कख, 376ख, धारा 376ग, धारा 376घ, 376घक, 376घख,] धारा 376ड या धारा 509 के अधीन दंडनीय संज्ञेय अपराध के संबंध में उसे दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 154 की उपधारा (1) के अधीन दी गई किसी सूचना को लेखबद्ध करने में असफल रहेगा,

वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किंतु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. 2013 के अधिनियम सं० 13 की धारा 3 द्वारा अंतःस्थापित ।
  2. 2019 के अधिनियम सं० 22 की धारा 2 द्वारा “धारा 376ख, धारा 376ग, धारा 376घ” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।