भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 9/178 / 570
167लोक सेवक, जो क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 30स्रोत
यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जो कोई लोक सेवक होते हुए और ऐसे लोक सेवक के नाते [किसी दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख की रचना या अनुवाद करने का भार-वहन करते हुए उस दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख की रचना, तैयार या अनुवाद] ऐसे प्रकार से जिसे वह जानता हो या विश्वास करता हो कि अशुद्ध है, इस आशय से, या सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि तद्द्वारा वह किसी व्यक्ति को क्षति कारित करे, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
संशोधन टिप्पणियां
- 2000 के अधिनियम सं० 21 की धारा 91 और पहली अनुसूची द्वारा कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।