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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 20/269 / 531

269प्रक्रिया, जहां अभियुक्त उन्मोचित नहीं किया जाता

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 274–275स्रोत

(1) यदि ऐसा साक्ष्य ले लिए जाने पर या मामले के किसी पूर्वतन प्रक्रम में मजिस्ट्रेट की यह राय है कि ऐसी उपधारणा करने का आधार है कि अभियुक्त ने इस अध्याय के अधीन विचारणीय ऐसा अपराध किया है जिसका विचारण करने के लिए वह मजिस्ट्रेट सक्षम है और जो उसकी राय में उसके द्वारा पर्याप्त रूप से दंडित किया जा सकता है तो वह अभियुक्त के विरुद्ध आरोप लिखित रूप में विरचित करेगा ।

(2) तब वह आरोप अभियुक्त को पढ़कर सुनाया और समझाया जाएगा और उससे पूछा जाएगा कि क्या वह दोषी होने का अभिवाक् करता है या प्रतिरक्षा करना चाहता है ।

(3) यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक् करता है तो मजिस्ट्रेट उस अभिवाक् को लेखबद्ध करेगा और उसके आधार पर उसे, स्वविवेकानुसार, दोषसिद्ध कर सकेगा ।

(4) यदि अभियुक्त अभिवाक् करने से इंकार करता है या अभिवाक् नहीं करता है या विचारण किए जाने का दावा करता है या यदि अभियुक्त को उपधारा (3) के अधीन दोषसिद्ध नहीं किया जाता है तो उससे अपेक्षा की जाएगी कि वह मामले की अगली सुनवाई के प्रारंभ में, या, यदि मजिस्ट्रेट उन कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, ऐसा ठीक समझता है तो, तत्काल बताए कि क्या वह अभियोजन के उन साक्षियों में से, जिनका साक्ष्य लिया जा चुका है, किसी की प्रतिपरीक्षा करना चाहता है और, यदि करना चाहता है तो किस की ।

(5) यदि वह कहता है कि वह ऐसा चाहता है तो उसके द्वारा नामित साक्षियों को पुनः बुलाया जाएगा और प्रतिपरीक्षा के और पुनःपरीक्षा (यदि कोई हो) के पश्चात् वे उन्मोचित कर दिए जाएंगे ।

(6) फिर अभियोजन के किन्हीं शेष साक्षियों का साक्ष्य लिया जाएगा और प्रतिपरीक्षा के और पुनःपरीक्षा (यदि कोई हो) के पश्चात् वे भी उन्मोचित कर दिए जाएंगे ।

(7) जहां इस संहिता के अधीन अभियोजन को अवसर दिए जाने के बावजूद और सभी युक्तियुक्त उपाय किए जाने के पश्चात्, यदि उपधारा (5) और उपधारा (6) के अधीन अभियोजन साक्षियों की उपस्थिति प्रतिपरीक्षा के लिए सुनिश्चित नहीं की जा सकती है, तो यह माना जाएगा कि साक्षी के उपलब्ध न होने के कारण ऐसे साक्षी की परीक्षा नहीं की गई है, और मजिस्ट्रेट ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएं अभियोजन साक्ष्य को बंद कर सकेगा और अभिलेख पर की सामग्रियों के आधार पर मामले में कार्यवाही कर सकेगा ।

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