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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 36/497 / 531

497कतिपय मामलों में विचारण लंबित रहने तक सम्पत्ति की अभिरक्षा और व्ययन के लिए आदेश

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 365स्रोत

(1) जब कोई सम्पत्ति, किसी दंड न्यायालय या विचारण के लिए मामले का संज्ञान या सुपुर्द करने हेतु सशक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष किसी अन्वेषण, जांच या विचारण के दौरान प्रस्तुत की जाती है तब वह न्यायालय या मजिस्ट्रेट उस अन्वेषण, जांच या विचारण के समाप्ति लंबित होने तक ऐसी सम्पत्ति की उचित अभिरक्षा के लिए ऐसा आदेश, जैसा वह ठीक समझे, कर सकेगा और यदि वह सम्पत्ति शीघ्रतया या प्रकृत्या क्षयशील है या यदि ऐसा करना अन्यथा समीचीन है तो वह न्यायालय या मजिस्ट्रेट ऐसा साक्ष्य अभिलिखित करने के पश्चात्, जैसा वह आवश्यक समझे, उसके विक्रय या उसका अन्यथा व्ययन किए जाने के लिए आदेश कर सकेगा ।

स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजन के लिए, “सम्पत्ति” के अन्तर्गत निम्नलिखित है,”

(क) किसी भी किस्म की सम्पत्ति या दस्तावेज जो न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाती है या जो उसकी अभिरक्षा में है ;

(ख) कोई भी सम्पत्ति जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है या जो किसी अपराध के करने में प्रयुक्त की गई प्रतीत होती है ।

(2) न्यायालय या मजिस्ट्रेट उपधारा (1) में निर्दिष्ट संपत्ति को उसके समक्ष प्रस्तुत करने से चौदह दिन की अवधि के भीतर ऐसी संपत्ति के ब्यौरे अंतर्विष्ट करने वाला विवरण ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में, जो राज्य सरकार नियमों द्वारा उपबंधित करे, तैयार करेगा ।

(3) न्यायालय या मजिस्ट्रेट उपधारा (1) में निर्दिष्ट संपत्ति का, फोटो खिंचवाएगा, और यदि आवश्यक हो, तो मोबाइल फोन या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक मीडिया पर वीडियो बनवाएगा ।

(4) उपधारा (2) के अधीन तैयार विवरण और उपधारा (3) के अधीन लिए गए फोटो या वीडियोग्राफी इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में उपयोग किए जाएंगे ।

(5) न्यायालय या मजिस्ट्रेट उपधारा (2) के अधीन तैयार किए गए विवरण और उपधारा (3) के अधीन लिए गए फोटो या वीडियोग्राफी लिए जाने के तीस दिन की अवधि के भीतर, संपत्ति के निपटान, नष्ट, अधिग्रहण या परिदान करने का आदेश ऐसी रीति में, जो इसमें इसके पश्चात् विनिर्दिष्ट है, करेगा ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।